हरियाणा में 'जमीन के बदले 4 गुना जमीन': निजी प्रोजेक्ट्स को रास्ता देने की नई नीति लागू
May 14, 2026 2:27 PM
हरियाणा। हरियाणा में अब उन निजी परियोजनाओं की राह में 'रास्ता' रोड़ा नहीं बनेगा, जो केवल जमीन की कमी या पहुंच मार्ग न होने की वजह से अधर में लटकी हुई थीं। प्रदेश सरकार ने 'हरियाणा ग्राम साझा भूमि (विनियमन) नियम' में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए निजी निवेशकों को शामलात देह (पंचायत की साझा जमीन) से रास्ता देने की अनुमति दे दी है। विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेन्द्र कुमार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार का यह कदम प्रदेश में औद्योगिक और निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
सख्त शर्तें: जमीन के बदले देनी होगी 4 गुना जमीन
सरकार ने रास्ता देने की प्रक्रिया को इतना आसान भी नहीं रखा है कि पंचायतों का नुकसान हो। इस नीति के तहत, यदि कोई निवेशक पंचायत से रास्ता लेता है, तो उसे बदले में परियोजना स्थल के पांच प्रतिशत हिस्से का मालिकाना हक सरकार को देना होगा। यदि रास्ते के लिए ली गई जमीन का चार गुना हिस्सा पांच प्रतिशत से अधिक बैठता है, तो निवेशक को वह चार गुना जमीन पंचायत के नाम करनी होगी। यानी पंचायत को न सिर्फ अपनी जमीन का पूरा हक मिलेगा, बल्कि उसके पास संसाधनों का भंडार भी बढ़ेगा।
पंचायत की मर्जी के बिना नहीं मिलेगी ईंट भी
इस नीति में सबसे अहम पहलू 'लोकतांत्रिक सहमति' का है। कोई भी निवेशक सीधे तौर पर जमीन पर दावा नहीं कर सकेगा। रास्ता देने के लिए ग्राम पंचायत के कम से कम 75 प्रतिशत निर्वाचित सदस्यों का प्रस्ताव पास होना जरूरी है। इतना ही नहीं, ग्राम सभा (गांव के सभी मतदाता) के भी 66 प्रतिशत सदस्यों की इस पर मुहर लगनी अनिवार्य है। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि गांव की साझा संपत्ति का बंदरबांट न हो सके और स्थानीय ग्रामीणों के हितों की रक्षा की जा सके।
मालिकाना हक और आम जनता का अधिकार
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि निजी निवेशक को रास्ता मिलने के बावजूद उस भूमि पर अंतिम अधिकार ग्राम पंचायत का ही रहेगा। यह रास्ता केवल उस निजी प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित नहीं होगा, बल्कि गांव का आम नागरिक भी इसका उपयोग कर सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन प्रोजेक्ट्स को संजीवनी मिलेगी जो कानूनी अड़चनों की वजह से बंद पड़े थे। वहीं, बदले में मिलने वाली जमीन से ग्राम पंचायतों के पास आय के नए स्रोत पैदा होंगे, जिनका उपयोग स्कूल, अस्पताल या खेल स्टेडियम जैसे सामुदायिक कार्यों में किया जा सकेगा।