निर्वाचन आयोग ने 16 राज्यों, तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के तीसरे चरण की घोषणा की
May 14, 2026 3:59 PM
देशभर में मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए चुनाव आयोग समय-समय पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया चलाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वोटर लिस्ट में नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना और गलत या डुप्लीकेट एंट्री को हटाना होता है। हाल के वर्षों में बिहार सहित कई राज्यों में यह अभियान चलाया गया, जिसके बाद अब दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी मतदाता सत्यापन किया गया है। SIR प्रक्रिया चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें चुनाव आयोग की टीमें घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करती हैं और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर वोटर लिस्ट को अपडेट करती हैं।
क्या है SIR प्रक्रिया
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान है। इस प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाते हैं और मतदाता सूची का सत्यापन करते हैं। इसमें 18 साल या उससे अधिक उम्र के नए नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल किया जाता है। इसके अलावा जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो किसी दूसरे शहर या राज्य में शिफ्ट हो गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पता और अन्य जानकारियों में त्रुटियों को भी इसी प्रक्रिया के दौरान सुधारा जाता है।
SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं से पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज मांगे जाते हैं। बूथ लेवल अधिकारी फॉर्म भरवाकर जानकारी को रिकॉर्ड करते हैं और उसके बाद डेटा को चुनाव आयोग के सिस्टम में अपडेट किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से दर्ज है या वह किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुका है, तो उसकी एंट्री में सुधार या नाम हटाने की कार्रवाई की जाती है। नए वोटर्स को आयु प्रमाण और निवास प्रमाण के आधार पर सूची में जोड़ा जाता है।
बिहार में पहले चरण की प्रक्रिया पूरी
SIR का पहला चरण बिहार में पूरा किया गया था। चुनाव आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया के बाद राज्य में 7.42 करोड़ मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में जारी किए गए। बिहार में इस अभियान के दौरान लाखों नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया, जबकि मृत और डुप्लीकेट एंट्री हटाई गईं। आयोग का कहना है कि इससे वोटर लिस्ट पहले की तुलना में अधिक सटीक और विश्वसनीय बनी है।
दूसरे चरण में कई बड़े राज्य शामिल
दूसरे चरण में चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में मतदाता सत्यापन अभियान चलाया। इन राज्यों में BLO ने घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया। चुनाव आयोग का मानना है कि लगातार शहरीकरण और लोगों के पलायन के कारण वोटर लिस्ट को नियमित रूप से अपडेट करना जरूरी हो गया है।
चुनावी पारदर्शिता के लिए अहम प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार SIR प्रक्रिया चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। इससे फर्जी वोटिंग की आशंका कम होती है और वास्तविक मतदाताओं की संख्या स्पष्ट होती है। चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव कराने के लिए सटीक मतदाता सूची बेहद जरूरी है। यही वजह है कि आयोग समय-समय पर इस तरह के विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाता रहता है।