ग्रामीणों की जीत! हिसार में 10 किमी के चक्कर से मिलेगा छुटकारा, बनेगा 2 किमी का नया लिंक रोड
May 04, 2026 11:16 AM
हिसार। हरियाणा के हिसार में महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के विस्तार ने विकास की नई उड़ान तो भरी, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह जी का जंजाल बन गया है। पिछले दो साल से बंद पुराने चंडीगढ़ रोड के विकल्प के तौर पर जिला प्रशासन जिस 8 किलोमीटर लंबे बाईपास की योजना पर अरबों रुपये फूंकने की तैयारी में था, उस पर अब अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) अपूर्व कुमार ने ब्रेक लगा दिए हैं। बरवाला में आयोजित समीक्षा बैठक में ACS ने साफ लहजे में कहा कि जब जनता को इस लंबे रास्ते की जरूरत ही नहीं है, तो सरकारी खजाने पर यह बोझ क्यों डाला जा रहा है।
करोड़ों के बजट और फिजूलखर्ची पर बरसे सचिव
बैठक के दौरान जब B&R (भवन एवं मार्ग) विभाग के अधिकारियों ने बताया कि NH-9 से NH-52 को जोड़ने वाले इस बाईपास के लिए 89 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण में जा चुके हैं और 153 करोड़ निर्माण पर खर्च होने हैं, तो ACS बिफर पड़े। उन्होंने तीखा सवाल किया कि क्या इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट का कोई सोशल या इकोनॉमिक ऑडिट किया गया है? अधिकारियों के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। ACS अपूर्व कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए इस प्रोजेक्ट को रद्द करने तक की संभावना जता दी है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।
राणा माइनर से निकलेगा समाधान का रास्ता
हिसार के तलवंडी राणा और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग पिछले लंबे समय से मात्र 2 किलोमीटर के एक छोटे लिंक रोड की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि प्रशासन उन्हें 8 किलोमीटर लंबा घूमकर जाने वाला रास्ता थमा रहा है, जबकि राणा माइनर के साथ सीधे रास्ते से शहर की दूरी कम हो सकती है। तलवंडी राणा रोड बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट ओपी कोहली के मुताबिक, ACS ने अब अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे राणा माइनर के साथ रोड का नया नक्शा तैयार करें ताकि जनता को राहत मिले और सरकारी पैसा भी बचे।
10 किलोमीटर के अतिरिक्त चक्कर से मिलेगी राहत
फिलहाल स्थिति यह है कि पुराना रास्ता बंद होने से ग्रामीणों को हिसार शहर पहुंचने के लिए हर रोज 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ता है। इससे न केवल निजी वाहनों का ईंधन खर्च बढ़ा है, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया भी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। ACS के जमीनी निरीक्षण के बाद अब उम्मीद जगी है कि 242 करोड़ के सफेद हाथी साबित होने वाले प्रोजेक्ट की जगह व्यावहारिक और छोटा रास्ता तैयार होगा। अब सबकी नजरें राणा माइनर के नए नक्शे और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।