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तानों से नहीं टूटीं निशु, लोडिंग गाड़ी चलाकर बदली परिवार की किस्मत, सोशल मीडिया पर छाईं

Mar 29, 2026 12:01 PM

जींद। कहते हैं कि हौसलों के तरकश में अगर मेहनत का तीर सलामत हो, तो किस्मत की बाजी पलटने में वक्त नहीं लगता। जींद जिले के छोटे से गांव हाडवा की रहने वाली निशु देशवाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। साल 2019 में जब उनके पिता मुकेश कुमार एक गंभीर बीमारी की चपेट में आए, तो परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। पशुपालन और लोडिंग गाड़ी चलाकर घर का गुजारा करने वाले पिता ने जब 2022 में पूरी तरह काम छोड़ दिया, तो निशु ने बीए की डिग्री हाथ में होने के बावजूद चूल्हा-चौका संभालने के बजाय गैराज का रास्ता चुना। समाज की परवाह किए बिना निशु ने पिता की लोडिंग गाड़ी का स्टेयरिंग थाम लिया और आज वह पूरे इलाके के लिए मिसाल बन चुकी हैं।

तानों से टकराकर बनाई पहचान, इंस्टाग्राम बना बुकिंग का जरिया

निशु के लिए यह सफर इतना आसान नहीं था। शुरुआत में जब एक लड़की को भारी वाहन चलाते देखा गया, तो गांव और समाज के कई लोगों ने उंगलियां उठाईं और तंज कसे। लेकिन निशु ने इन तानों को अनसुना कर अपने काम पर ध्यान लगाया। निशु ने आधुनिक दौर के साथ कदम मिलाते हुए सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल किया। आज उन्हें अधिकांश बुकिंग उनके इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए मिलती है। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और एक पुरानी गाड़ी से सफर शुरू करने वाली निशु ने आज अपने बेड़े में दो गाड़ियां शामिल कर ली हैं। इतना ही नहीं, खेती-किसानी के लिए उन्होंने एक ट्रैक्टर भी खरीदा है, जिसे वह खुद चलाकर खेतों की जुताई करती हैं।

हरियाणा रोडवेज का ड्राइवर बनने की ठानी

सिर्फ निजी गाड़ियों तक निशु का सफर थमने वाला नहीं है। उनका असली लक्ष्य हरियाणा रोडवेज की 'सारथी' बनना है। निशु चाहती हैं कि वे सरकारी बस चलाकर यह साबित करें कि बेटियां किसी भी मायने में लड़कों से कम नहीं हैं। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र से हैवी ड्राइविंग लाइसेंस (HTV) का कोर्स भी पूरा कर लिया है और लगातार अभ्यास में जुटी हैं। निशु के भाई भी इस संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

"बेटियां कुछ भी कर सकती हैं, बस हौसला चाहिए"

निशु की कहानी आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में हार मान लेती हैं। निशु का मानना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसे करने का जुनून होना चाहिए। आज हाडवा गांव के वही लोग जो कभी संदेह की नजर से देखते थे, निशु को गुजरते देख गर्व से कहते हैं कि "हमारी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है।" निशु न केवल अपने परिवार की रीढ़ बनी हैं, बल्कि उन्होंने यह भी साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो हर मुश्किल रास्ता खुद-ब-खुद आसान हो जाता है।

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