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बासमती निर्यात पर ₹70 लेवी हटाने की मांग तेज, हरियाणा के एक्सपोर्टर्स बोले—बढ़ रहा संकट

Apr 17, 2026 4:10 PM

करनाल। हरियाणा के बासमती चावल निर्यातकों ने केंद्र सरकार से ₹70 प्रति मीट्रिक टन (पीएमटी) की लेवी को तत्काल हटाने या स्थगित करने की मांग की है। हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और एपीडा के चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात और बढ़ती लागत के बीच यह शुल्क उद्योग के लिए बड़ा बोझ बन गया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील जैन ने कहा कि बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फंड के तहत लगाई जा रही ₹70 पीएमटी लेवी और उस पर जीएसटी से निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले ही उद्योग कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है और ऐसे में यह अतिरिक्त भार स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

क्यों बढ़ी परेशानी?

युद्ध और वैश्विक तनाव से व्यापार प्रभावित

शिपमेंट में देरी और माल का डायवर्जन

फ्रेट और बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी

शिपिंग कंपनियों के अतिरिक्त सरचार्ज

विदेशों में भुगतान अटकने से कैश फ्लो पर असर

सुशील जैन के मुताबिक, मौजूदा समय में निर्यातकों को शिपमेंट में देरी, कंटेनर डिटेंशन और वेयरहाउसिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा शिपिंग कंपनियां इमरजेंसी चार्ज और अतिरिक्त फ्रेट वसूल रही हैं, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि बासमती का कारोबार सीजनल होता है, जिसमें किसानों से खरीद के बाद लंबे समय तक स्टॉक रखना पड़ता है। ऐसे में वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ जाता है और जब निर्यात भुगतान भी समय पर नहीं मिलता, तो स्थिति और कठिन हो जाती है।

एमएसएमई निर्यातकों पर डबल मार

ब्याज सब्सिडी में लगातार कटौती

लागत बढ़ी, लेकिन मुनाफा घटा

छोटे निर्यातकों के लिए फंड जुटाना मुश्किल

लेवी से बढ़ा अतिरिक्त आर्थिक बोझ

एसोसिएशन ने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय से ब्याज सब्सिडी में कटौती के कारण खासकर एमएसएमई निर्यातकों को ज्यादा नुकसान हो रहा है। पहले से ही कम मार्जिन पर काम कर रहे निर्यातकों के लिए यह लेवी और मुश्किलें बढ़ा रही है।

निर्यातकों ने चेतावनी दी है कि अगर यह शुल्क जारी रहता है, तो भारतीय बासमती की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। इससे निर्यात घटेगा और इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाली धान की कीमतों पर पड़ेगा।

 कैसे बढ़ा ₹10 से ₹70 तक शुल्क?

शुरुआत में ₹10 प्रति टन शुल्क लगाया गया

बाद में बढ़ाकर ₹30 किया गया

शर्त थी—फंड ₹10 करोड़ से ऊपर होने पर शुल्क खत्म होगा

पिछले साल बढ़ाकर ₹70 प्रति टन कर दिया गया

उद्योग पर करीब ₹50 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया ने बताया कि करीब 30 साल पहले बासमती निर्यात को बढ़ावा देने के लिए यह शुल्क शुरू किया गया था। लेकिन अब इसे ₹70 प्रति टन तक बढ़ा दिया गया है, जो उद्योग के लिए भारी साबित हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि मौजूदा वैश्विक संकट के समय उद्योग को राहत देने के लिए इस लेवी को तुरंत स्थगित किया जाए। निर्यातकों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो हरियाणा समेत देश के बासमती उद्योग और इससे जुड़े लाखों किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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