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12% नहीं अब 14% नमी पर हो उठान, चढ़ूनी ने वीडियो जारी कर उठाई मांग

Apr 12, 2026 12:24 PM

कुरुक्षेत्र। हरियाणा में गेहूं की कटाई का सीजन परवान पर है, लेकिन कुदरत के बदलते मिजाज ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। इसी संकट के बीच भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने रविवार सुबह एक वीडियो संदेश जारी कर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी है। चढ़ूनी ने साफ कहा कि जब से फसल पककर तैयार हुई है, तभी से प्रदेश के कई हिस्सों में ओलावृष्टि और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी है। ऐसे में गेहूं की नमी का स्तर कम नहीं हो पा रहा है और मंडियों में 12 प्रतिशत नमी की शर्त किसानों के लिए गले की फांस बन गई है।

14% नमी की छूट और चमक पर रियायत की मांग

गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने केंद्र और प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह किसान की पैदा की हुई समस्या नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक आपदा है। उन्होंने पुरजोर मांग की कि गेहूं खरीद के लिए नमी की सीमा को तत्काल प्रभाव से 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाए। साथ ही, बारिश की वजह से जिन दानों की चमक (Luster Loss) कम हो गई है, उन पर भी खरीद में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए। चढ़ूनी के मुताबिक, धूप कम निकलने और बादलों की आवाजाही के कारण गेहूं को सुखाना मुमकिन नहीं हो पा रहा, जिससे मंडियों में अनाज का अंबार लग रहा है।

आगजनी और बीमा कंपनियों की बेरुखी पर बरसे किसान नेता

फसल सुरक्षा को लेकर भी भाकियू अध्यक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ ही खेतों में आगजनी की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे किसान की साल भर की मेहनत मिनटों में खाक हो रही है। दुखद यह है कि ऐसी स्थिति में न तो बीमा कंपनियां किसानों की सुध ले रही हैं और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस मुआवजे का प्रावधान है। चढ़ूनी ने मांग की है कि आग से प्रभावित होने वाली फसलों का शत-प्रतिशत हर्जाना सरकार को खुद देना चाहिए ताकि अन्नदाता को बर्बादी से बचाया जा सके।

'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल के नियमों में बदलाव की अपील

खरीद प्रक्रिया को और अधिक लचीला बनाने के लिए चढ़ूनी ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव सरकार के सामने रखा है। उन्होंने मांग की है कि 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर दर्ज प्रति एकड़ उत्पादन में कम से कम 10 प्रतिशत तक की छूट दी जाए। अक्सर देखा जाता है कि पोर्टल पर दर्ज आंकड़े और असल उत्पादन में फर्क होता है, जिसके चलते किसानों को अपनी पूरी फसल बेचने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। चढ़ूनी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सरकार ने समय रहते इन मांगों पर गौर नहीं किया, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।

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