कुरुक्षेत्र न्यूज़: निजीकरण के खिलाफ लामबंद हुए रोडवेज कर्मी, नरेंद्र पांचाल ने सरकार की नीतियों को घेरा
May 16, 2026 11:33 AM
कुरुक्षेत्र। हरियाणा में सरकारी परिवहन व्यवस्था यानी हरियाणा रोडवेज को बचाने के लिए कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुरुक्षेत्र डिपो समेत प्रदेशभर के कर्मचारी इस समय डिपो स्तर पर बैठकें कर आगामी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा का आरोप है कि प्रदेश सरकार धीरे-धीरे रोडवेज को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने की बिसात बिछा रही है। इसी के विरोध में आगामी 20 मई को रोहतक की धरती पर एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया जा रहा है, जहां से सरकार के खिलाफ आर-पार के आंदोलन का शंखनाद होगा।
1000 बसों के खेल में आधी प्राइवेट, युवाओं और यात्रियों दोनों को नुकसान
कर्मचारी नेताओं ने हाल ही में रोडवेज बेड़े में 1000 नई बसें शामिल करने के सरकारी फैसले की अंतर्कथा को उजागर किया है। ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के कुरुक्षेत्र डिपो प्रधान नरेंद्र पांचाल ने बताया कि इन 1000 बसों में से 500 बसें निजी ऑपरेटरों की होंगी, जिन्हें किलोमीटर स्कीम के तहत चलाया जाएगा। यह सीधे तौर पर रोडवेज का निजीकरण है। उन्होंने आगे कहा कि महंगे दामों पर प्राइवेट कंपनियों से इलेक्ट्रिक बसें अनुबंधित की जा रही हैं, जिसका सीधा बोझ जनता की जेब पर पड़ेगा। प्राइवेट ऑपरेटरों की तानाशाही पहले ही जगजाहिर है, और इस फैसले के बाद आम मुसाफिरों का सफर और महंगा व असुरक्षित हो जाएगा।
'चार साल से सिर्फ खोखले वादे मिले', कुरुक्षेत्र डिपो ने कसी कमर
बैठक के दौरान यूनियन के सचिव रणजीत करोड़ा ने कुरुक्षेत्र डिपो के चालक, परिचालक और वर्कशॉप स्टाफ से भारी संख्या में रोहतक पहुंचने की अपील की है। नेताओं का दर्द है कि पिछले चार-पांच सालों से सरकार केवल टेबल टॉक (वार्ता) के नाम पर कर्मचारियों को बहला रही है। कई बार लिखित और मौखिक समझौते हुए, लेकिन जब बात उन्हें अमलीजामा पहनाने की आई तो सरकार ने हमेशा फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दीं। कर्मचारियों का साफ कहना है कि अगर रोडवेज में पक्की भर्तियां बंद हुईं और प्राइवेट बसों का दखल इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में यह महकमा सिर्फ इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा।