कुरुक्षेत्र डीसी का बड़ा एक्शन: कोर्ट केसों में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज, 1 महीने का अल्टीमेटम
May 16, 2026 11:09 AM
कुरुक्षेत्र। अदालती मुकदमों में सरकारी विभागों की तरफ से होने वाली लेत-लतीफी पर कुरुक्षेत्र जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उपायुक्त (डीसी) विश्राम कुमार मीणा ने दोटूक शब्दों में कहा है कि अब सालों-साल तक अदालतों में सरकारी जवाब (जवाब दावा) का इंतजार नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को लंबित कोर्ट केसों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी अधिकारी की व्यक्तिगत लापरवाही या सुस्ती के कारण कोर्ट में कोई भी सरकारी मामला लंबित नहीं रहना चाहिए। अगर ऐसा पाया गया, तो संबंधित अधिकारी की सर्विस बुक पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
ऑनलाइन बैठक में ली क्लास, जमीनी स्तर के राजस्व अधिकारियों को सख्त निर्देश
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त ने कुरुक्षेत्र के अलग-अलग उपमंडलों के अधिकारियों के पेंच कसे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए एसडीएम पिहोवा अनिल दून, एसडीएम शाहाबाद शम्भू राठी समेत लाडवा और इस्माईलाबाद के तहसीलदारों व राजस्व विभाग के अधिकारियों से सीधे बात की। डीसी ने कई पुराने मामलों का रिकॉर्ड खंगालते हुए पूछा कि आखिर किस वजह से अब तक कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यप्रणाली में जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम जनता और सरकार दोनों का नुकसान होता रहेगा।
एक्शन टेकन रिपोर्ट करना होगा अपलोड, कुरुक्षेत्र के प्रशासनिक अमले में मची खलबली
नए निर्देशों के मुताबिक, अब सभी विभागों के मुखियाओं को अपने-अपने स्तर पर कोर्ट केसों की निगरानी करनी होगी। केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि अधिकारियों को बाकायदा 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) को तय समय के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इस सख्त रवैये के बाद कुरुक्षेत्र के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप का माहौल है। बैठक में उपायुक्त के साथ अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) विवेक आर्य, एसडीएम अमन कुमार और जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) चेतना चौधरी समेत कई विभागों के आला अफसर मौजूद रहे, जिन्हें तत्काल प्रभाव से इन आदेशों को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।