नौकरी मांगने वाले नहीं नौकरी देने वाले बनें छात्र, कुलगुरु प्रो. सचदेवा का युवाओं को प्रेरक संदेश
May 02, 2026 2:12 PM
कुरुक्षेत्र (जग मार्ग)। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ITTR) के प्रांगण में शुक्रवार को वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह की रौनक बिखरी। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने संस्थान के उन होनहारों को सम्मानित किया, जिन्होंने साल भर खेलकूद, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था।
विकसित भारत @2047 के लिए युवा संकल्प जरूरी
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रो. सचदेवा ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश को 'विकसित भारत अभियान 2047' के लक्ष्य तक ले जाने की जिम्मेदारी आज के युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने युवाओं की मानसिकता में बदलाव की वकालत करते हुए कहा, "आज के प्रतिस्पर्धी दौर में सिर्फ नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय उद्यमिता (Entrepreneurship) और नवाचार (Innovation) को अपनाएं। संकल्प लें कि आप नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले बनेंगे।"
जीवनशैली में झलके स्वदेशी का रंग
कुलगुरु ने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए 'स्वदेशी' को केवल नारों तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वदेशी का भाव हमारी वेशभूषा, खान-पान और जीवनशैली में पूरी तरह से परिलक्षित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा और ईमानदारी ही वह आधार है, जिस पर सफलता की स्थायी इमारत खड़ी होती है।
भावी शिक्षकों को दिया विशेष संदेश
चूंकि कार्यक्रम भावी शिक्षकों के बीच था, इसलिए प्रो. सचदेवा ने शिक्षक की भूमिका को समाज के शिल्पकार के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि वह समाज का निर्माण करता है। शिक्षण-अधिगम के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ उन्होंने शोध (Research) की संस्कृति विकसित करने और ऊर्जा के नए संसाधनों की खोज पर भी बल दिया। समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। बीएड छात्रा अंजलि और अनीसा के समूह गीत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं डॉ. दिग्विजय सिंह ने स्वदेशी और स्वावलंबन पर आधारित गीतों के जरिए राष्ट्रभक्ति का संचार किया। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन वंशित्ता ने किया और अंत में सहायक प्रोफेसर दिविज गुगनानी ने आभार व्यक्त किया।