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कुरुक्षेत्र में इतिहास रचा: 500 ड्रोनों ने आसमान में दिखाई दशमेश पिता की वीरता, देखें तस्वीरें

Apr 15, 2026 11:12 AM

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय बैसाखी महोत्सव की अंतिम शाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। केडीबी मेला ग्राउंड में आयोजित इस उत्सव के समापन पर जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि तिल रखने की जगह नहीं बची। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने दीप प्रज्वलित कर संध्या का आगाज किया। महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण रहा कुरुक्षेत्र के इतिहास का पहला और सबसे भव्य ड्रोन शो। जैसे ही रात के अंधेरे में 500 ड्रोनों ने एक साथ उड़ान भरी, पूरा आसमान दूधिया रोशनी और विभिन्न कलाकृतियों से जगमगा उठा। इन ड्रोनों ने हवा में 327 साल पहले गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना के दृश्यों को जिस खूबसूरती से उकेरा, उसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया।

कुलविंदर बिल्ला के गानों पर झूमे दर्शक, बिखरे पंजाबी संस्कृति के रंग

सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण मशहूर पंजाबी गायक कुलविंदर बिल्ला रहे। उन्होंने जैसे ही अपने लोकप्रिय गीतों की झड़ी लगाई, पांडाल में मौजूद युवा अपनी सीटों से उठकर थिरकने लगे। 'लाइट वेट' और 'टाइम टेबल' जैसे गानों पर दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। कुलविंदर ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि पंजाबी लोक विरासत और बैसाखी के महत्व को अपने गीतों के जरिए बखूबी पेश किया। स्थिति यह थी कि कड़ाके की भीड़ के बावजूद लोग देर रात तक गानों की धुन पर झूमते नजर आए। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं और नागरिकों को कोई असुविधा न हो।

कृषि मंत्री का संदेश: किसान की मेहनत और एकता का पर्व है बैसाखी

समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि बैसाखी महज एक त्यौहार नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली कृषि परंपरा और अन्नदाता की मेहनत का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इसी दिन किसान अपनी खून-पसीने से सींची गई फसल को घर लाता है, जो समाज में समृद्धि का संचार करती है। मंत्री ने कुरुक्षेत्र की इस पावन भूमि पर गुरुओं के बलिदान को याद करते हुए कहा कि बैसाखी हमें सामाजिक एकता और अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और जिला प्रशासन को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी, जिसने आधुनिक तकनीक (ड्रोन) और परंपरा का अनूठा संगम पेश किया।

पहली बार दिखा ऐसा नजारा, दोपहर से ही जुटने लगी थी भीड़

कुरुक्षेत्र के लोगों के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया था। दोपहर बाद से ही मेला ग्राउंड के आसपास लोगों का हुजूम जुटना शुरू हो गया था। ड्रोन शो की चर्चा पूरे शहर में थी, जिसके चलते न केवल कुरुक्षेत्र बल्कि आसपास के जिलों से भी लोग इस विहंगम दृश्य के गवाह बनने पहुंचे। आसमान में बनी कलाकृतियों ने दशमेश पिता के साहस और सिख इतिहास की चमक को जिस तरह से पेश किया, उसने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया। महोत्सव के समापन के साथ ही कुरुक्षेत्र ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर अग्रसर है।

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