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कुरुक्षेत्र में बिजली लाइन पर बवाल: खेतों के बीच खंभे लगाने से भड़के किसान, काम रोका

May 08, 2026 2:20 PM

कुरुक्षेत्र। विकास और किसान के हितों के बीच की जंग अब कुरुक्षेत्र के खेतों तक पहुंच गई है। गांव किरमिच से सुनहेड़ी खालसा तक बिछाई जा रही नई बिजली लाइन को लेकर विवाद गहरा गया है। किसानों के भारी विरोध के चलते वीरवार को लगातार दूसरे दिन भी काम ठप रहा। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर गौर नहीं किया जाता, वे खंभे नहीं लगने देंगे। अब सबकी नजरें शुक्रवार को होने वाली पंचायत पर टिकी हैं, जहां विभाग और किसान इस खींचतान का हल ढूंढने की कोशिश करेंगे।

किसानों का आरोप: अधिकारियों की मिलीभगत से खराब की जा रही जमीन

भाकियू नेता संजू नंबरदार, दिलबाग सिंह बारवा और संजीव आलमपुर की अगुवाई में एकजुट हुए किसानों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का कहना है कि यह लाइन जानबूझकर और मिलीभगत के चलते खेतों के बीचों-बीच से निकाली जा रही है। किसानों के मुताबिक, "कहीं तो खंभे सड़क के बिल्कुल साथ हैं, लेकिन कई जगह जानबूझकर खेतों के अंदर 10-10 फीट दूर खंभे गाड़ दिए गए हैं। इससे किसानों की बेशकीमती जमीन का एक बड़ा हिस्सा बेकार हो जाएगा और वहां फसल पैदा करना नामुमकिन होगा।" किसानों की मांग है कि बिजली निगम को यह लाइन पूरी तरह सड़क के किनारे ही रखनी चाहिए।

बिजली निगम की दलील: हर तरफ से मिल रहा है विरोध

दूसरी ओर, बिजली निगम के एसडीओ सुभाष पानू ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि काम को जानबूझकर नहीं लटकाया जा रहा। उन्होंने बताया कि शुरुआत में जब सड़क किनारे खंभे खड़े करने की कोशिश की गई, तो वहां भी कई ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया था। इसी विरोध के चलते तकनीकी रूप से खंभों को थोड़ा खेतों की तरफ शिफ्ट करना पड़ा। हालांकि, अब स्थिति तनावपूर्ण है, जिसे देखते हुए विभाग ने काम रुकवा दिया है।

आज की पंचायत पर टिकी उम्मीदें

पिछले दो दिनों से जारी इस रस्साकशी को खत्म करने के लिए शुक्रवार को एक साझा पंचायत बुलाई गई है। इसमें बिजली निगम के अधिकारी, प्रशासनिक प्रतिनिधि और किसान संगठनों के नेता शामिल होंगे। पंचायत में इस बात पर मंथन होगा कि लाइन का रूट क्या हो जिससे किसानों का नुकसान भी न हो और बिजली आपूर्ति का काम भी पूरा हो सके। फिलहाल, खेतों में काम बंद है और किसान अपनी जमीन बचाने के लिए लामबंद हैं।

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