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NIT कुरुक्षेत्र सुसाइड केस में बड़ा एक्शन: वॉर्डन समेत 3 अधिकारी हटाए, परीक्षाएं टलीं

Apr 18, 2026 10:55 AM

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। बीटेक की होनहार छात्रा दीक्षा की कथित आत्महत्या के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। संस्थान प्रशासन ने शुरुआती दबाव के बाद शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए गर्ल्स हॉस्टल की चीफ वार्डन, डिप्टी वार्डन और एसोसिएट डीन (स्टूडेंट वेल्फेयर) को उनके पदों से हटा दिया है। कैंपस में बढ़ते तनाव और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने 4 मई तक शैक्षणिक अवकाश घोषित कर दिया है, वहीं 5 मई तक होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं।

"मेरी बेटी बुजदिल नहीं थी": पिता ने संस्थान की थ्योरी को नकारा

छात्रा का शव लेने कुरुक्षेत्र पहुंचे पिता शशि कुमार दुबे और अन्य परिजनों के सब्र का बांध रविवार को टूट गया। बिलखते पिता ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी पढ़ाई में बेहद होनहार थी और वह सुसाइड जैसा आत्मघाती कदम कभी नहीं उठा सकती थी। परिजनों का कहना है कि घटना से कुछ समय पहले तक घर पर सामान्य बातचीत हुई थी, जिसमें दीक्षा कहीं से भी मानसिक तनाव में नहीं दिख रही थी। परिवार ने अब साफ कर दिया है कि वे इस मामले में सीबीआई या क्राइम ब्रांच की जांच से कम पर राजी नहीं होंगे।

सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका, हॉस्टल खाली कराने पर उठे सवाल

मृतका के चचेरे भाई प्रकाश उपाध्याय ने संस्थान प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद छात्रा की सहेलियों को आनन-फानन में छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि यह जांच को प्रभावित करने और गवाहों को मौके से हटाने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में एनआईटी कुरुक्षेत्र में यह चौथी आत्महत्या की घटना है। परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय पुलिस और संस्थान प्रशासन ने न्याय नहीं दिया, तो वे बिहार से लेकर दिल्ली तक सड़कों पर उतरेंगे।

पुलिस का पक्ष: शिकायत मिलने का इंतज़ार, जांच की बात बरकरार

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दो डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया, जिसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। थाना केयूके प्रभारी विशाल कुमार ने बताया कि फिलहाल पुलिस को परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने पिछले सुसाइड केसों का हवाला देते हुए कहा कि उन मामलों में भी जांच जारी है। हालांकि, संस्थान के भीतर बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं ने एनआईटी के 'कौंसिलिंग सिस्टम' और सुरक्षा प्रबंधों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग को कब स्वीकार करती है।

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