Search

कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा, यूपी के कासगंज में छिपा है फर्जी मुहरों का राज

Mar 28, 2026 9:59 AM

पंचकूला। पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये के गबन मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव की गिरफ्तारी के बाद अब एजेंसी ने रजत दहरा नाम के शख्स को दबोचा है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पता चला है कि निगम के खातों से जो पैसा गायब हुआ, उसमें से करीब 70 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अकेले रजत के बैंक अकाउंट में लैंड हुई थी। रजत ने इस पैसे को दबाकर रखने के बजाय तुरंत सफेद करने की कोशिश की और इसे कई रीयल एस्टेट बिल्डरों और रसूखदार निजी लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।

यूपी के कासगंज तक फैला जाल, फर्जी मुहरों ने बनाया काम आसान

इस घोटाले की जड़ें सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके तार उत्तर प्रदेश से भी जुड़ रहे हैं। एसीबी सूत्रों के मुताबिक, सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने के लिए बड़े पैमाने पर नकली स्टाम्प (फर्जी मुहरों) का सहारा लिया गया। ये मुहरें कथित तौर पर पंचकूला नगर निगम के ही कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से तैयार करवाई गई थीं। मुख्य आरोपी दिलीप राघव अभी रिमांड पर है, लेकिन वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। एजेंसी उसे अब यूपी के कासगंज लेकर जाएगी, जहां उन फर्जी स्टाम्प और वाउचरों की बरामदगी की कोशिश की जाएगी जिनके जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

बैंक के 4 खातों का कच्चा चिट्ठा और अफसरों पर लटकी तलवार

सतर्कता ब्यूरो की टीम ने कोटक महिंद्रा बैंक में मौजूद पंचकूला नगर निगम के चार प्रमुख खातों (2015073031, 2046279112, 2013457703 और 2046903758) के पिछले 6-8 सालों का पूरा डेटा निकाल लिया है। इन खातों में 2018 से लेकर मार्च 2026 तक हुए हर छोटे-बड़े ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच हो रही है। इस बीच, गुरुवार को पंचकूला नगर निगम के वरिष्ठ लेखा अधिकारी से भी लंबी पूछताछ की गई है। संदेह है कि बैंक के वाउचरों और चेकों पर लगी फर्जी मुहरें विभाग के भीतर से ही मैनेज की गई थीं।

150 करोड़ की बंदरबांट, अभी एक और संदिग्ध फरार

एसीबी की रडार पर फिलहाल दो ऐसे चेहरे हैं जिन्हें करीब 150 करोड़ रुपये की 'कमीशन' या डायरेक्ट ट्रांसफर मिला था। इनमें से रजत तो पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन 80 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी करने वाला दूसरा संदिग्ध अभी भी एजेंसी की पहुंच से बाहर है। जांचकर्ताओं का कहना है कि जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ रही हैं, बैंक के कुछ और वरिष्ठ अधिकारियों और निगम के बाबूओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। पंचकूला कोर्ट में रिमांड के दौरान एसीबी ने साफ कहा कि यह सिर्फ बैंक फ्रॉड नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के साथ हुई एक बड़ी धोखाधड़ी है।

You may also like:

Please Login to comment in the post!