पंचकूला: भारत की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संघों के आह्वान पर गुरुवार को पंचकूला में देशव्यापी हड़ताल का जबरदस्त असर देखने को मिला। शहर की सड़कों पर हजारों की संख्या में उतरे कर्मचारी और मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और विशाल जुलूस निकाला।


सेक्टर-5 में एकजुटता का प्रदर्शन

गुरुवार सुबह से ही विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता सेक्टर 5 स्थित धरना स्थल पर एकत्रित होने शुरू हुए। यहाँ एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता नितिन सिंगला (सकसं हरियाणा), प्रधान रमा (सीटू), बलवान सिंह (इंटक), हरबंस लाल (एटक), लैक सिंह (रिटायर्ड कर्मचारी संघ) सहित किसान नेता कामरेड वेद प्रकाश और गुरप्यार सिंह ने की।


किसान और मजदूर विरोधी है सरकार की नीतियां

सभा को संबोधित करते हुए श्रवण कुमार जांगड़ा, नसीब जाखड़ और राजीव चौहान ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विदेशी वित्तीय पूंजी के दबाव में आकर ऐसी नीतियां थोप रही है जो सीधे तौर पर किसान और मजदूर विरोधी हैं। नेताओं ने विशेष रूप से नया बीज विधेयक 2025, बिजली निजीकरण विधेयक 2025, नया मंडी कानून प्रारूप 2025 का विरोध किया और इन्हें किसानों और मजदूरों के लिए सरकार द्वारा किया गया विश्वासघात बताया। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौतों को भारतीय खेती और स्थानीय व्यापार के लिए खतरा बताया। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी न देना मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों पर हमले की श्रेणी में रखा गया।


निजीकरण और श्रम कानूनों पर हमला

यूनियन नेताओं सोनू नागर, जोगिंदर सिंह और राय सिंह ने कहा कि सरकार ने मजदूरों के सुरक्षा कानूनों को खत्म कर चार श्रम संहिताओं को थोप दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसे रोजगार गारंटी कानून को कमजोर किया जा रहा है। बैंक, बीमा और सार्वजनिक क्षेत्रों का अंधाधुंध निजीकरण हो रहा है। स्थायी पदों को खत्म कर ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है। पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के बजाय सामाजिक सुरक्षा पेंशन (बुढ़ापा, विधवा, विकलांग) में कटौती की जा रही है। गरीबों के राशन कार्ड काटे जा रहे हैं और भवन निर्माण मजदूरों की कल्याणकारी योजनाओं को बंद किया जा रहा है।


शहर भर में निकाला गया रोष मार्च

सभा के बाद हजारों प्रदर्शनकारी धरना स्थल से रवाना हुए। यह जुलूस शहर के विभिन्न हिस्सों और सभी विभागों के मुख्यालयों से होता हुआ गुजरा। प्रदर्शनकारियों ने गगनभेदी नारों के साथ 'लेबर कोड वापस लो' और 'निजीकरण बंद करो' की मांग की। रैली के अंत में जत्था पुनः धरना स्थल पर पहुंचा।


हड़ताल को विपक्षी राजनीतिक दलों ने भी दिया समर्थन 

इस हड़ताल को विपक्षी राजनीतिक दलों ने भी अपना पूर्ण समर्थन दिया। माकपा नेता रणधीर सिंह, भाकपा जिला सचिव मामचंद बसिया और कांग्रेस जिला अध्यक्ष संजय चौहान ने व्यक्तिगत रूप से धरना स्थल पर पहुंचकर सभा को संबोधित किया। उन्होंने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि वे सदन से लेकर सड़क तक इन मांगों के लिए संघर्ष करेंगे।


प्रमुख वक्ताओं की उपस्थिति

इस विशाल सभा को सुनीता मान (आंगनवाड़ी), संगीता (मिड डे मील), अनिल सांगवान, विजय पाल, जय नारायण, रामचंद्र, बलवान सिंह, जगबीर सिंह, रामपाल मलिक, राम सिंह, सतबीर धनखड़, ताराचंद कादयान, हरबंस आदिवाल, राजेश ढांडा, मंजीत सिंह और रामदेव पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित किया और आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।

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