खाटूश्याम भक्तों के लिए खुशखबरी: पानीपत के चुलकाना धाम के लिए बनेगा अलग श्राइन बोर्ड, कैबिनेट की मंजूरी
May 19, 2026 2:38 PM
पानीपत। पानीपत के समालखा क्षेत्र में स्थित चुलकाना धाम, जिसे खाटूश्याम जी की बेहद पवित्र और प्राचीन तपोस्थली माना जाता है, अब सरकारी देखरेख में एक भव्य धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंदिर के सुचारू प्रबंधन के लिए 'श्री बाबा खाटूश्याम श्राइन बोर्ड' के गठन से जुड़े अध्यादेश के मसौदे को पास कर दिया गया।
दरअसल, इस प्रोजेक्ट की नींव पिछले साल ही रख दी गई थी जब 23 जनवरी 2025 को कैबिनेट ने इसके गठन के प्रस्ताव को पहली बार मंजूरी दी थी। हालांकि, तब स्थानीय 'श्रीश्याम मंदिर सेवा समिति' की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब इस साल 14 मई को हाईकोर्ट ने मामले का अंतिम निपटारा करते हुए सरकार को आगे बढ़ने के निर्देश दे दिए हैं। सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि पुरानी समिति के अनुभवों का लाभ लेने के लिए उनके एक सदस्य को भी नए बोर्ड में जगह दी जाएगी।
4.68 एकड़ का परिसर, तिरुपति और वैष्णो देवी की तर्ज पर मिलेंगी सुविधाएं
सरकारी योजना के मुताबिक, यह नया श्राइन बोर्ड मंदिर के अधिकार क्षेत्र वाली करीब 4.68 एकड़ भूमि पर काम करेगा। बोर्ड का पूरा ढांचा पेशेवर और पारदर्शी होगा, जिससे मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे और संपत्तियों का सही इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए किया जा सके।
यहां हर महीने आने वाले लाखों भक्तों को अब पार्किंग की किल्लत, अव्यवस्थित ट्रैफिक और पीने के पानी जैसी बुनियादी समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा। बोर्ड के गठन के बाद यहां आधुनिक धर्मशालाएं (यात्री निवास), विश्वस्तरीय स्वच्छता प्रणाली, परिष्कृत सुरक्षा चक्र और विशाल पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे। त्योहारों और मेलों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक विशेष क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ नियंत्रण) प्लान भी तैयार किया जाएगा।
महाभारत कालीन आस्था का केंद्र, कलयुग के देव की भूमि
चुलकाना धाम का इतिहास बेहद गौरवशाली और सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान खाटूश्याम जी दरअसल भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र वीर बर्बरीक का ही साक्षात स्वरूप हैं, जिन्हें स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। इसी धरती पर बर्बरीक ने धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश दान किया था।
आज इस धाम की महिमा इतनी है कि यहां सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं। विशेषकर फाल्गुन महीने की एकादशी और द्वादशी को यहां पैर रखने तक की जगह नहीं होती। सरकार का मानना है कि श्राइन बोर्ड बनने के बाद इस तपोस्थली को राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर वह स्थान मिल सकेगा, जिसकी यह हकदार है।