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हरियाणा: मानवाधिकार आयोग ने तालाब में बच्चों के डूबने के मामले में भिवानी प्रशासन को फटकार लगाई

Feb 09, 2026 11:02 AM

चंडीगढ़: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भिवानी जिले के सुमरा खेड़ा गांव में एक खुले तालाब में तीन नाबालिगों की डूबने से हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना ‘मानवीय गरिमा पर सीधा हमला’ है। आयोग ने पाया कि सुरक्षा उपायों के अभाव में तीन बच्चों का डूबना महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और असंवेदनशीलता का परिणाम है। आयोग के न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन के समक्ष प्रस्तुत शिकायत के अनुसार, गांव के घनी आबादी वाले क्षेत्र में वर्षों से ठहरे हुए पानी से भरा एक खुला तालाब मौजूद है।



अधिकारियों से बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई बाड़, चेतावनी संकेत या चारदीवारी नहीं बनाई गई। आयोग ने कहा कि पानी से आने वाली दुर्गंध और संक्रामक रोगों का खतरा ग्रामीणों के स्वास्थ्य के अधिकार का घोर उल्लंघन है। जैन ने चार फरवरी को जारी एक आदेश में कहा कि ऐसी परिस्थितियां संविधान के अनुच्छेद 21 का गंभीर उल्लंघन हैं, जो प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, स्वच्छ और गरिमापूर्ण वातावरण में रहने का अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों जैसे अत्यंत संवेदनशील वर्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 39(ई) और 39(एफ) के तहत राज्य के संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन है। जैन ने बार-बार चेतावनी और शिकायतों के बावजूद किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की।


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