Cocktail 2 Movie Review: रश्मिका-शाहिद की ओवरएक्टिंग ने किरकिरा किया मजा, लेकिन कृति सेनन ने लूट ली महफिल
Jun 19, 2026 6:45 PM
सबसे पहले यह साफ करना जरूरी है कि निर्देशक होमी अदजानिया की 'कॉकटेल 2' पहली फिल्म की कहानी को आगे नहीं बढ़ाती। सैफ-दीपिका वाली फिल्म से इसका कोई सीधा कनेक्शन नहीं है, लेकिन हां— दोस्ती, बेपनाह मोहब्बत, गलतफहमियां और दिल टूटने का वही पुराना 'कॉकटेल' फ्लेवर नए अंदाज में परोसा गया है। कहानी शुरू होती है कुणाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) से, जो स्कूल के दिनों से एक-दूसरे के प्यार में गिरफ्तार हैं। लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप की दूरियां और कोरोना काल की दुश्वारियां झेलने के बाद अब दोनों लिव-इन में रह रहे हैं। दोनों के बीच सब कुछ इतना परफेक्ट है कि कुणाल अक्सर कहता है कि वे बिना फेरों के ही पति-पत्नी जैसे हैं। लेकिन जिंदगी हमेशा सीधी नहीं चलती। एक छोटी सी गलतफहमी इस हंसते-खेलते रिश्ते की बुनियाद हिला देती है, और इसी मोड़ पर एंट्री होती है एली (कृति सेनन) की, जिसके बाद वफादारी और जज्बात के सारे समीकरण बदल जाते हैं।
सिसिली की खूबसूरत लोकेशंस और होमी अदजानिया का निर्देशन
फिल्म की जो बात दर्शकों को थिएटर तक खींचने का माद्दा रखती है, वह है इसका कैनवास। होमी अदजानिया ने आज के दौर के कशमकश से भरे रिश्तों को बेहद सलीके से पर्दे पर उतारा है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है। इटली का ऐतिहासिक और खूबसूरत शहर सिसिली फिल्म में महज एक लोकेशन नहीं, बल्कि कहानी के एक अहम किरदार की तरह उभरता है। कुणाल और दिया अपनी शादी के लिए जोड़े गए पैसों से सिसिली की सैर पर निकलते हैं, और वहीं से उनके रिश्तों की दिशा और दशा हमेशा के लिए बदल जाती है। विजुअल्स इतने शानदार हैं कि वे कमजोर स्क्रीनप्ले को भी कुछ देर के लिए संभाल लेते हैं।
कहां चूक गई फिल्म? शाहिद-रश्मिका की ओवरएक्टिंग पड़ी भारी
शानदार लोकेशंस और आज के जमाने की लव स्टोरी होने के बावजूद फिल्म लेखन और अभिनय के स्तर पर हिचकोलें खाती है। शाहिद कपूर, जो अपनी संजीदा और बेहतरीन अदाकारी के लिए जाने जाते हैं, इस फिल्म में थोड़े लाउड नजर आए। कई दृश्यों में उनकी अदाकारी जरूरत से ज्यादा यानी ओवरएक्टिंग की सीमा को छूती है, जो खटकती है। रश्मिका मंदाना के हिस्से भी कुछ खास करने को नहीं आया और उनका किरदार फीका सा लगता है। दूसरी तरफ, कृति सेनन स्क्रीन पर बेहद ग्लैमरस और खूबसूरत लगी हैं, लेकिन उनके किरदार को उतनी गहराई (डेप्थ) नहीं दी गई, जितनी 'कॉकटेल' में दीपिका के 'वेरोनिका' वाले किरदार को मिली थी।
अंतिम फैसला: क्या टिकट खिड़की पर पैसे खर्च करना सही है?
'कॉकटेल 2' की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पुरानी फिल्म की कार्बन कॉपी बनने की कोशिश नहीं करती, बल्कि आज की पीढ़ी की रिलेशनशिप की उलझनों को ईमानदारी से छूने का प्रयास करती है। अगर आप भारी-भरकम अभिनय की उम्मीद छोड़कर सिर्फ एक हल्की-फुल्की रोमांटिक ड्रामा, बेहतरीन संगीत और खूबसूरत नजारे देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म वीकेंड पर एक बार देखी जा सकती है। हालांकि, यह पहली 'कॉकटेल' जैसा कल्ट स्टेटस हासिल कर पाएगी, इसकी उम्मीद कम ही है।