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पिहोवा के गांव भट्टेड़ी में लगा 'खेत बचाओ अभियान', किसानों को मुफ्त मिला फसलों का सुरक्षा कवच ट्राइकोडर्मा

Jun 19, 2026 5:27 PM

पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा) धान की रोपाई के इस चालू सीजन में किसानों को लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने के आधुनिक तौर-तरीकों से रूबरू कराने के लिए पिहोवा के गांव भट्टेड़ी में कृषि विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण सलाहकार डॉ. जे. पी. सिंह के दिशा-निर्देशों पर क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद और जिला कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 'खेत बचाओ अभियान' चलाया गया। इस जागरूकता शिविर में आस-पास के गांवों के 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया और वैज्ञानिकों से खेती-किसानी से जुड़े तकनीकी सवाल-जवाब किए।

फसलों का सुरक्षा कवच है 'ट्राइकोडर्मा', अत्यधिक कीटनाशक हैं आत्मघाती: डॉ. मनीष वत्स

उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. मनीष वत्स ने कार्यशाला में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल हमारी जमीनों को बंजर बना रहा है। इस निर्भरता को कम करने के लिए विभाग ने किसानों को 'ट्राइकोडर्मा' नामक जैविक फंगस की किट मुफ्त बांटी। विशेषज्ञों ने बताया कि यह एक मित्र फंगस है, जो फसल की जड़ों के चारों ओर सुरक्षा कवच बनाकर हानिकारक फंगस और बीमारियों को पास नहीं फटकने देती। इसका उपयोग बीज, पौध और मिट्टी के उपचार में रामबाण साबित होता है। वैज्ञानिकों ने चेताया कि खेतों में बेतहाशा जहर (कीटनाशक) छिड़कने से फसलों की रक्षा करने वाले मित्र कीट भी मर जाते हैं, जिससे पर्यावरण और इंसानी सेहत को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

धान की सीधी बिजाई से बचेगा पानी; पिछले साल के 'बौने रोग' से रहें सतर्क

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पारंपरिक कद्दू (लेह) विधि के बजाय धान की सीधी बिजाई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस विधि से न केवल लेबर (मजदूरी) का खर्च बचता है, बल्कि पानी की भी भारी बचत होती है। शिविर में पिछले साल धान की फसल में आए खतरनाक 'बौने रोग' (बौनापन) पर भी विशेष रूप से माथापच्ची की गई। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह वायरस जनित रोग 'व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर' नाम के कीट से फैलता है। इससे बचने का एकमात्र उपाय यही है कि किसान शुरुआती स्तर पर ही फसल की निगरानी करें और अनिवार्य रूप से बीज का उपचार करने के बाद ही बिजाई करें।

एक एकड़ से प्राकृतिक खेती की शुरुआत और एग्री स्टैक आईडी की अनिवार्यता

डॉ. मनीष वत्स ने किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा कि हर किसान भाई को अपने परिवार के स्वास्थ्य की खातिर कम से कम एक एकड़ भूमि में प्राकृतिक और रसायन मुक्त खेती की शुरुआत जरूर करनी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध अनाज मिल सके। इसके साथ ही, किसानों को आधुनिक डिजिटल युग से जोड़ने के लिए 'एग्री स्टैक आईडी' बनवाने के फायदे गिनाए गए, ताकि भविष्य में फसलों की खरीद और सब्सिडी का लाभ सीधे उनके खातों में पहुंच सके। शिविर में कीटनाशकों के सुरक्षित रख-रखाव और उनके जहरीले प्रभाव से बचने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए गए।

इस मौके पर मौजूद रहा कृषि विभाग का अमला

इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए खंड कृषि अधिकारी डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुरेश, डॉ. लक्ष्मी कांत और डॉ. के.पी. शर्मा सहित वनस्पति संरक्षण विभाग व आत्मा योजना के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीणों की ओर से पूर्व सरपंच मामराज, गुरदेव, कृष्ण सहित भारी संख्या में पहुंचे स्थानीय आढ़तियों और किसान भाइयों ने विभाग के इस प्रयास की सराहना की।

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