भिवानी में 24 जून को जुटेंगी हरियाणा की मिड डे मील कार्यकर्ता, सरकार के खिलाफ राज्य स्तरीय प्रदर्शन का एलान
Jun 19, 2026 5:35 PM
ढांड (नरेश ढांडा) सरकारी स्कूलों में नौनिहालों का पेट भरने वाली मिड डे मील कार्यकर्ताओं का सब्र अब जवाब दे गया है। चूल्हे की आग और रसोई की गर्मी में दिन गुजारने वाली ये महिलाएं अब अपने हक के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। मिड डे मील कार्यकर्ता यूनियन हरियाणा (पंजीकृत संख्या 2077) ने आगामी 24 जून को भिवानी में एक बड़े राज्य स्तरीय प्रदर्शन का एलान किया है। यूनियन की जिला संयोजक संतोष देवी ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि रसोई गैस, दूध और राशन की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने इन गरीब परिवारों की कमर तोड़कर रख दी है और सरकार आंखें मूंदे बैठी है।
'स्कूल खुलने से छुट्टी तक खटती हैं, पर सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं?'
संतोष देवी ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये कार्यकर्ता सुबह स्कूल खुलने से लेकर छुट्टी की घंटी बजने तक पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं देती हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो सरकारी कर्मचारी माना जाता है और न ही सूबे में तय न्यूनतम वेतन का लाभ मिल रहा है। आज के इस महंगे दौर में उन्हें 'स्वयंसेवक' के नाम पर महज सात हजार रुपये की खैरात (मासिक मानदेय) थमा दी जाती है। सितम यह है कि यह मामूली रकम भी महीनों अटक-अटक कर मिलती है और गर्मियों की छुट्टियों के नाम पर साल में दो महीने का वेतन साफ काट लिया जाता है। आखिर दो महीने इन रसोइयों के चूल्हे कैसे जलेंगे, इसकी फिक्र किसी को नहीं है।
12 महीने का मिले मानदेय, रिटायरमेंट पर हो 5 लाख का इंतजाम
यूनियन ने सरकार के सामने मांगों का एक लंबा पुलिंदा रखा है। उनकी पुरजोर मांग है कि मिड डे मील कार्यकर्ताओं को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन, चिकित्सा भत्ता, छुट्टियां और पेंशन के लाभ दिए जाएं। इसके अलावा, 10 महीने की बजाय पूरे 12 महीने का मानदेय मिले, ड्रेस भत्ता बढ़ाया जाए और 25 बच्चों की संख्या पर कम से कम दो रसोइयों की नियुक्ति की जाए। साथ ही, सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष करने और रिटायरमेंट पर कम से कम 5 लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता देने की भी मांग की गई है। कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए यूनियन ने कहा कि हर स्कूल के किचन में गैस सिलेंडर और आधुनिक उपकरण सरकार मुहैया कराए और ड्यूटी के दौरान किसी हादसे में मौत होने पर परिवार को 5 लाख का मुआवजा मिले।
कुसुम पांचाल की बहाली के लिए भी आर-पार की लड़ाई
इस आंदोलन का एक बड़ा सिरा सांगठनिक स्वाभिमान से भी जुड़ा है। यूनियन ने साफ कहा है कि किसी भी कार्यकर्ता को दुर्भावना के चलते नौकरी से नहीं हटाया जाना चाहिए। हाल ही में सेवामुक्त की गईं संगठन की प्रांतीय महासचिव कुसुम पांचाल समेत देश और राज्य भर की उन तमाम कार्यकर्ताओं को बिना शर्त तुरंत ड्यूटी पर वापस लिया जाए, जिन्हें हक मांगने की सजा दी गई है। यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रदेश के कोने-कोने में सक्रिय मिड डे मील कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अपनी सोई हुई किस्मत को जगाने और गूंगी-बहरी सरकार को अपनी ताकत दिखाने के लिए 24 जून को ठीक 11 बजे भिवानी के नेहरू पार्क जरूर पहुंचें।