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Chandigarh News: चंडीगढ़ में दूषित पानी की सप्लाई का मामला संसद तक पहुंचा, तिवारी ने मांगा सरकार से जवाब

Mar 13, 2026 10:55 AM

चंडीगढ़: शहर के कुछ क्षेत्रों में ड्रिंकिंग वाटर सप्लाई के मामले को लेकर लोकसभा में प्रश्न उठाया गया। सांसद मनीष तिवारी ने इस संबंध में सरकार से जानकारी मांगी कि क्या शहर के कुछ इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई के कारण लोगों के बीमार पड़ने की शिकायतें मिली हैं और सरकार ने इस पर क्या कदम उठाए हैं। इस प्रश्न के जवाब में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि वाटर सप्लाई और उसकी क्वालिटी की निगरानी राज्यों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी होती है, जबकि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय और तकनीकी सहयोग देती है।

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन ने बताया है कि मौलीजागरां, दरिया और हल्लोमाजरा  क्षेत्रों से पानी में गंदगी की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। अधिकांश मामलों में पाइपलाइन मरम्मत कार्य के दौरान सप्लाई में कीचड़युक्त पानी आने की बात सामने आई। इसके अलावा कुछ स्थानों पर लोगों द्वारा सप्लाई बंद रहने के समय मोटर पंप सीधे वितरण लाइनों से जोड़ने के कारण पाइप जोड़ों पर दबाव बढ़ गया, जिससे मिट्टी पानी में मिल गई। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए तुरंत कार्रवाई करते हुए पानी के नमूनों की जांच करवाई। पिछले तीन महीनों में 1995 पानी के नमूनों की जांच राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कराई गई, जिनकी रिपोर्ट संतोषजनक पाई गई। साथ ही पाइपलाइन की फ्लशिंग कराई गई और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले पानी में उचित क्लोरीनेशन सुनिश्चित किया गया।


मौलीजागरां व दरिया को नहर जल से जोड़ने और पाइपलाइन बदलने की तैयारी

प्रशासन ने यह भी बताया कि चंडीगढ़ की वाटर सप्लाई व्यवस्था काफी पुरानी है, जिसके कारण कई बार पाइपों में लीकेज की समस्या सामने आती है। ऐसे मामलों में तुरंत मरम्मत कार्य कराया जाता है। लॉन्ग टर्म योजना के तहत मौलीजागरां और दरिया जैसे क्षेत्रों को ग्राउंडवाटर पर निर्भरता से हटाकर नहर के पानी से जोड़ने तथा पुराने वितरण पाइपों को चरणबद्ध तरीके से डक्टाइल आयरन पाइपों से बदलने की योजना बनाई गई है।


चंडीगढ़ में 166.39 करोड़ की सात जल व सीवर परियोजनाएं स्वीकृत

केंद्र सरकार की योजना अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन और अमृत  2.0 के तहत चंडीगढ़ में कुल 166.39 करोड़ रुपये की लागत से सात परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें दो वाटर सप्लाई परियोजनाएं (43.77 करोड़ रुपये) और पांच सीवर तथा सेप्टेज मैनेजमेंट परियोजनाएं (122.62 करोड़ रुपये) शामिल हैं इन परियोजनाओं के तहत 10.5 किलोमीटर नई वाटर पाइपलाइन और लगभग 239.69 किलोमीटर सीवर नेटवर्क का कंस्ट्रक्शन या रिप्लेसमेंट किया जाएगा।


शहर में 1.76 लाख से अधिक वाटर और 2.36 लाख सीवर कनेक्शन उपलब्ध

सरकार ने बताया कि वर्तमान में चंडीगढ़ में 1.76 लाख से अधिक वाटर कनेक्शन और 2.36 लाख सीवर कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। साथ ही वाटर क्वालिटी की निगरानी, पाइपलाइन नेटवर्क की डिजिटल मैपिंग और 24×7 सुरक्षित ड्रिंकिंग वाटर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं को रोका जा सके।


अमृत/अमृत 2.0 से शहरों में सुरक्षित ड्रिंकिंग वाटर, स्मार्ट मॉनिटरिंग और 24×7 सप्लाई पर जोर

केंद्र सरकार ने बताया कि शहरों में सुरक्षित ड्रिंकिंग वाटर व्यवस्था मजबूत करने के लिए अमृत  और अमृत  2.0 के तहत व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। इन योजनाओं की गाइडलाइंस के अनुसार पुराने और जर्जर बुनियादी ढांचे को बदलने, संवेदनशील पाइपलाइन क्रॉसिंग को दुरुस्त करने तथा दबाव-नियंत्रित वाटर सप्लाई सिस्टम विकसित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि पानी के प्रदूषण का जोखिम कम किया जा सके। मिशन के तहत 24 घंटे सुरक्षित ड्रिंकिंग वाटर सप्लाई, ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ (डीएफटी) क्वालिटी वाला पानी, ऑनलाइन वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग, सेंसर और सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (स्काडा) जैसी स्मार्ट तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। 

साथ ही वाटर क्वालिटी जांच में समुदाय की भागीदारी, विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया है। वाटर सप्लाई सिस्टम को स्मार्ट बनाने के लिए 258 योजनाओं में स्काडा आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है, जबकि अमृत  2.0 के तहत 1,422 जल परियोजनाओं में भी स्काडा सिस्टम का प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत अंतिम छोर तक कनेक्शन पहुंचाने के लिए प्रति कनेक्शन 3,000 रुपये तक की सहायता भी दी जा रही है, ताकि अवैध कनेक्शनों को कम किया जा सके। सेवा वितरण में सुधार के लिए डीएफटी परियोजनाओं की पहल के तहत अब तक 348 शहरी निकायों में 407 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनमें 1,153 डिस्ट्रिक्ट मीटर्ड एरिया (डीएमए) शामिल हैं और इससे लगभग 16.72 लाख घरों को लाभ मिलने की उम्मीद है।


अमृत योजनाओं से देशभर में वाटर सप्लाई और सीवर नेटवर्क मजबूत

  • अब तक शहरी क्षेत्रों में 246 लाख पानी के नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।
  • 182 लाख सीवर कनेक्शन प्रदान किए गए, जिनमें फीकल स्लज और सेप्टेज प्रबंधन से जुड़े घर भी शामिल हैं।
  • 93,457.51 किलोमीटर जल पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया या बदला गया।
  • 26,995.61 किलोमीटर सीवर नेटवर्क का निर्माण या प्रतिस्थापन किया गया।

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