अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी की बढ़ी मुश्किलें: 45 करोड़ के जमीन घोटाले में 17 अप्रैल तक जेल
Apr 04, 2026 2:57 PM
फरीदाबाद। राजधानी दिल्ली में शिक्षा की आड़ में चल रहे करोड़ों के फर्जीवाड़े और जमीन हड़पने के खेल में अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी पर कानून का शिकंजा और कस गया है। शनिवार को दिल्ली की एक अदालत ने सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) से जुड़े एक गंभीर मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के समक्ष पेशी के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सिद्दीकी की कस्टडी खत्म होने पर उसे जेल भेजने की सिफारिश की थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी, तब तक सिद्दीकी को सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
कौड़ियों के भाव दिखाई 45 करोड़ की जमीन: ईडी का बड़ा खुलासा
प्रवर्तन निदेशालय की तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोप है कि मदनपुर खादर गांव में स्थित करीब 1.14 एकड़ जमीन, जिसकी बाजार दर 45 करोड़ रुपये है, उसे सिद्दीकी ने 'तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन' के जरिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अधिग्रहित किया। कागजों पर इस बेशकीमती जमीन की कीमत महज 75 लाख रुपये दिखाई गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि सिद्दीकी ने कुछ रसूखदार लोगों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची और सरकारी तंत्र को गुमराह कर जमीन की हेराफेरी को अंजाम दिया। यह सिद्दीकी के खिलाफ ईडी का दूसरा बड़ा एक्शन है, जो उनकी 'सफेदपोश' छवि पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
415 करोड़ का छात्र फंड घोटाला और लाल किला ब्लास्ट से कनेक्शन
जावेद सिद्दीकी का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले नवंबर 2025 में भी उसे छात्रों के साथ धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी का आरोप है कि अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्थानों ने 2018 से 2025 के बीच छात्रों से करीब 415.10 करोड़ रुपये जुटाए, जिनका इस्तेमाल शैक्षणिक कार्यों के बजाय निजी ऐश-ओ-आराम और संपत्तियों में किया गया। इतना ही नहीं, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सिद्दीकी पर यूजीसी (UGC) और एनएएसी (NAAC) की फर्जी मान्यता दिखाकर हजारों छात्रों के भविष्य से खेलने का केस भी दर्ज किया है।
सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर 'सफेदपोश आतंकी' मॉड्यूल
सिद्दीकी और उनके विश्वविद्यालय की मुश्किलें केवल आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं हैं। मामला तब और गंभीर हो गया जब लाल किले के पास हुए बम विस्फोट की जांच में इस संस्थान का नाम उछला। 10 नवंबर को हुए उस ब्लास्ट में 15 बेगुनाह लोगों की जान गई थी। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहनता से जांच कर रही हैं कि क्या अल-फलाह विश्वविद्यालय के संसाधनों या फंड का इस्तेमाल किसी 'सफेदपोश आतंकी' मॉड्यूल को संरक्षण देने या उसे चलाने में किया गया। फिलहाल, चौतरफा घिरे सिद्दीकी के लिए कानूनी राहत की राह काफी मुश्किल नजर आ रही है।