जीजेयू बवाल: दिग्विजय चौटाला पर FIR के बाद हिसार में सियासी भूचाल, गिरफ्तारी देने पहुंचे दुष्यंत
Apr 17, 2026 5:35 PM
हिसार। हिसार का गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय कल एक बार फिर सुर्खियों में रहा, लेकिन इस बार वजह शिक्षा नहीं बल्कि सरेराह हुआ हंगामा और उसके बाद शुरू हुई राजनीति है। जेजेपी की युवा विंग और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच छिड़ी जंग अब पूरी तरह सरकार बनाम विपक्ष का रूप ले चुकी है। पुलिस ने जब दिग्विजय चौटाला और उनके साथियों पर एफआईआर दर्ज कर छह कार्यकर्ताओं को उठाया, तो जेजेपी ने इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार देते हुए सीधे पुलिस कप्तान के दफ्तर का घेराव कर दिया।
अनुमति की जंग और वीसी दफ्तर पर हमला
पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने जेजेपी के प्रस्तावित 'युवा सम्मेलन' को परिसर में करने की इजाजत नहीं दी। इसके बाद यादव धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में दिग्विजय चौटाला के तीखे भाषणों ने माहौल गरमा दिया। आरोप है कि उनके आह्वान पर भीड़ वीसी ऑफिस की ओर बढ़ी और वहां लगे सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया। प्रदर्शन के दौरान गमले तोड़े गए और वीसी कार्यालय के मुख्य द्वार को क्षति पहुंचाई गई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि कुलपति नरसीराम बिश्नोई को पिछले दरवाजे से सुरक्षित बाहर निकलना पड़ा।
दुष्यंत चौटाला का गंभीर आरोप: "पुलिस ने मर्यादा लांघी"
मामले में मोड़ तब आया जब पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईए की टीमें आधी रात को कार्यकर्ताओं के घरों में बिना महिला पुलिस के दाखिल हुईं और परिजनों के साथ बदसलूकी की गई। दुष्यंत ने तीखे लहजे में कहा, "जिन 6 लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनका नाम एफआईआर में है ही नहीं। पुलिस सीसीटीवी के डीवीआर तक उठाकर ले गई है, जैसे कि वे किसी बड़े अपराधी को पकड़ रहे हों।" उन्होंने साफ किया कि अगर पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारी, तो जेजेपी का हर कार्यकर्ता गिरफ्तारी देने को तैयार है।
एसपी का स्टैंड और आगे की रणनीति
दूसरी ओर, हिसार पुलिस अपने रुख पर कायम है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
फिलहाल, हिसार में सियासी तापमान चरम पर है। जेजेपी ने 27 अप्रैल को दोबारा बड़े प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है, जिससे साफ है कि जीजेयू का यह 'लाइसेंस' विवाद अभी शांत होने वाला नहीं है। एक तरफ प्रशासन कानून का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ जेजेपी इसे अपने संगठन को दबाने की साजिश बताकर सड़कों पर उतरने की तैयारी में है।