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लोकसभा में गूंजी हरियाणा की विशेषज्ञता: रामनारायण यादव ने 17 देशों के प्रतिनिधियों को सिखाया दल-बदल कानून

Apr 17, 2026 3:38 PM

हरियाणा। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों में अपनी विधायी विशेषज्ञता के लिए पहचाने जाने वाले रामनारायण यादव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर हरियाणा और भारत का मान बढ़ाया है। लोकसभा की ओर से मिले विशेष निमंत्रण पर यादव ने 'दल-बदल विरोधी कानून' जैसे जटिल विषय पर दुनिया भर से आए संसदीय प्रतिनिधियों का मार्गदर्शन किया। इस कार्यक्रम में 17 देशों के 43 प्रतिनिधि शामिल हुए, जो भारत की अनूठी लोकतांत्रिक व्यवस्था और विधायी प्रक्रियाओं को समझने के लिए यहाँ आए हैं।

"आया राम-गया राम" से स्थिरता तक: कानून की बारीकियों पर चर्चा

अपने संबोधन में रामनारायण यादव ने दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) की आवश्यकता और इसके ऐतिहासिक संदर्भों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत जैसे विविधतापूर्ण और विशाल लोकतंत्र में राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए यह कानून एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ा है। यादव ने व्यावहारिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून केवल नेताओं को दल बदलने से नहीं रोकता, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की अपने मतदाताओं के प्रति जवाबदेही भी तय करता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इस बात पर विशेष दिलचस्पी दिखाई कि भारतीय न्यायपालिका और सदन के अध्यक्ष के बीच इस कानून को लेकर किस तरह का संतुलन बना रहता है।

संसदीय परंपराओं का वैश्विक आदान-प्रदान

रामनारायण यादव के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम केवल व्याख्यान नहीं बल्कि 'नॉलेज शेयरिंग' का एक सशक्त जरिया हैं। उन्होंने कहा, "जब हम अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ अपनी संसदीय परंपराओं को साझा करते हैं, तो भारत की 'लोकतंत्र की जननी' वाली छवि वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत होती है।" गौरतलब है कि ये सभी विदेशी मेहमान पिछले एक महीने से भारत में संसदीय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं।

राजस्थान विधानसभा का रुख करेंगे विदेशी प्रतिनिधि

प्रशिक्षण का यह सफर दिल्ली में रुकने वाला नहीं है। लोकसभा में रामनारायण यादव के इस ज्ञानवर्धक सत्र के बाद, अब इन प्रतिनिधियों के अगले चरण की शुरुआत होगी। प्रशिक्षण के अगले पड़ाव में इन्हें एक सप्ताह के लिए राजस्थान विधानसभा ले जाया जाएगा। वहां वे राज्य स्तरीय विधायी प्रक्रियाओं, प्रश्नकाल और बजट सत्र जैसी बारीकियों को जमीनी स्तर पर करीब से देखेंगे।

संसदीय विषयों पर रामनारायण यादव की पकड़ का लोहा लोकसभा भी मानती रही है, यही वजह है कि उन्हें समय-समय पर ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों में विशेषज्ञ के तौर पर आमंत्रित किया जाता है।

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