बहादुरगढ़ में मौत का तांडव: अवैध पीवीसी गोदाम में लगी आग, झुग्गी में सो रहा युवक जिंदा जला
Apr 13, 2026 2:10 PM
झज्जर। हरियाणा के बहादुरगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक खौफनाक नतीजा सामने आया है। बीती रात छोटूराम नगर इलाके में स्थित एक अवैध पीवीसी कबाड़ गोदाम में लगी भीषण आग ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक युवक को मौत की नींद सुला दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि पास ही बनी झुग्गी में सो रहे शिवबाबू को संभलने तक का मौका नहीं मिला। जब तक दमकल की गाड़ियां पहुंचतीं, करीब एक एकड़ में फैला प्लास्टिक का कबाड़ और मशीनें आग के गोले में तब्दील हो चुकी थीं।
नींद में ही घिर गया शिवबाबू, ढाई महीने पहले ही आया था बहादुरगढ़
दमकल अधिकारी दीपांशु के मुताबिक, घटना की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटों ने गोदाम के पास बनी अस्थायी झुग्गियों को चंद मिनटों में राख कर दिया। मृतक की पहचान शिवबाबू के रूप में हुई है, जो महज ढाई महीने पहले ही अपने परिवार का पेट पालने के लिए सुनहरे भविष्य के सपने लेकर बहादुरगढ़ आया था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात के सन्नाटे में जब आग भड़की, तो जहरीले धुएं और आग की दीवारों ने शिवबाबू को चारों तरफ से घेर लिया, जिससे उसकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
8 दमकल गाड़ियों ने बुझाई आग, प्रशासन की नींद पर सवाल
हादसे की सूचना मिलते ही बहादुरगढ़ और आसपास के केंद्रों से दमकल की 8 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। प्लास्टिक और पीवीसी के चलते आग बुझाना दमकलकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। घंटों की मशक्कत के बाद आग को और फैलने से रोका गया, लेकिन तब तक शिवबाबू का शरीर पूरी तरह झुलस चुका था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। परिजनों को सूचना दे दी गई है और उनके आने के बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
रिहायशी इलाकों में मौत के गोदाम?
इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिहायशी इलाकों के इतने करीब एक एकड़ में फैला पीवीसी का अवैध गोदाम कैसे चल रहा था? क्या अग्निशमन विभाग से इसकी एनओसी (NOC) ली गई थी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में ऐसे कई अवैध गोदाम चल रहे हैं जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस अवैध गोदाम के मालिक पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर एक गरीब की जान की कीमत महज 'जांच का विषय' बनकर रह जाएगी।