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बहादुरगढ़ स्कूल में छात्राओं से ढुलवाए डेस्क: वीडियो वायरल होने के बाद प्राचार्या को नोटिस जारी

May 07, 2026 12:23 PM

बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ शहर के पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी स्कूल के अनुशासन और व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि स्कूल में डेस्क लेकर पहुंची एक गाड़ी से छात्राओं से डेस्क उतरवाए गए और उन्हें स्कूल परिसर के अंदर तक रखवाया गया। पढ़ने की उम्र में छात्राओं के हाथों में भारी-भरकम फर्नीचर देख राहगीरों ने आपत्ति जताई और किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद मामला चर्चा का केंद्र बन गया।

मजदूरों का काम छात्राओं के हवाले, अभिभावकों में नाराजगी

घटना के समय स्कूल में ड्यूल डेस्क से भरी एक गाड़ी आई थी। नियमतः इस सामान को उतारने और रखने के लिए मजदूरों या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मदद ली जानी चाहिए थी, लेकिन कथित तौर पर छात्राओं को ही इस काम में लगा दिया गया। वीडियो में छात्राएं भारी डेस्क उठाती हुई नजर आ रही हैं। यह खबर जैसे ही फैली, अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं, न कि इस तरह का शारीरिक श्रम करने। यह घटना सीधे तौर पर बाल अधिकारों और शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन है।

शिक्षा विभाग का कड़ा एक्शन, प्राचार्या को थमाया नोटिस

मामला तूल पकड़ते ही झज्जर के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (DEO) रतिंद्र सिंह ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया है। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्कूल की प्राचार्या को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि छात्राओं से इस तरह का कार्य करवाना पूरी तरह गलत है और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने स्कूल प्रबंधन से पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों में छात्राओं को डेस्क ढोने के काम में लगाया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

जांच के बाद होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्राचार्या के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला, तो विभागीय नियमों के तहत प्राचार्या और जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर बहस छिड़ी हुई है और लोग सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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