Kaithal Crime: कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग पर हरे-भरे पेड़ों को आग लगा रहे शरारती तत्व
Jun 11, 2026 5:34 PM
ढांड (नरेश ढांडा): एक तरफ जहां ग्लोबल वार्मिंग और भीषण गर्मी से निजात पाने के लिए सरकार से लेकर सामाजिक संस्थाएं 'पौधे लगाओ-पर्यावरण बचाओ' का नारा बुलंद कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कैथल के ढांड क्षेत्र में कुछ उपद्रवी तत्व इस मुहिम को सीधे तौर पर ठेंगा दिखा रहे हैं। क्षेत्र में पिछले कुछ समय से एक बेहद चिंताजनक और शर्मनाक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहां सड़कों के किनारे छांव देने वाले और पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले हरे-भरे वृक्षों को जानबूझकर आग के हवाले किया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बेजुबान पेड़ों पर हो रहे इस अत्याचार पर न तो स्थानीय प्रशासन की नजर जा रही है और न ही वन विभाग (Forest Department) की नींद टूट रही है।
सुनसान रास्तों पर रच रहे साजिश, सोलू माजरा के पास बरसों पुराना पेड़ हुआ जमींदोज
जमीनी हकीकत पर गौर करें तो ये असामाजिक तत्व बेहद शातिराना अंदाज में वारदात को अंजाम देते हैं। रात के अंधेरे या दोपहर के सुनसान वक्त में, जब सड़कों पर ट्रैफिक कम होता है, ये लोग जानबूझकर पेड़ों के सूखे तनों के निचले हिस्से में सूखी झाड़ियां रखकर आग लगा देते हैं। धीरे-धीरे यह आग पेड़ के भीतर तक फैल जाती है। कई बार जागरूक राहगीरों की नजर पड़ जाती है, तो वे तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित कर देते हैं और दमकल कर्मी मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लेते हैं। लेकिन अगर समय रहते किसी की नजर न पड़े, तो पेड़ अंदर ही अंदर खोखला होकर पूरी तरह नष्ट हो जाता है।
ऐसा ही एक ताजा और दर्दनाक मामला कैथल-कुरुक्षेत्र मुख्य मार्ग पर स्थित गांव सोलू माजरा के नजदीक देखने को मिला। यहां एक विशालकाय और हरा-भरा वृक्ष पूरी तरह आग की लपटों की भेंट चढ़ गया। आग इतनी भयंकर थी कि उसकी तपिश से आसपास उगे कई छोटे-बड़े पौधे भी झुलस कर राख के ढेर में तब्दील हो गए।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले— 'पेड़ काटने पर जुर्माना, तो जलाने पर जेल क्यों नहीं?'
इस घटना के बाद से ढांड और सोलू माजरा के ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पेड़ हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन रेखा हैं। गर्मियों में ये राहगीरों को तपती धूप से बचाते हैं, लेकिन कुछ लोग अपनी कुत्सित मानसिकता के कारण इन्हें खत्म करने पर तुले हैं। ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई किसान या आम आदमी गलती से कोई पेड़ काट दे, तो वन विभाग तुरंत जुर्माना ठोक देता है, लेकिन जब सरेआम सरकारी संपत्ति और पर्यावरण को जलाया जा रहा है, तो विभाग हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है?
इलाके के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला उपायुक्त और वन विभाग के आला अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि इस रूट पर पुलिस और वन कर्मियों की रात्रिकालीन गश्त (नाइट पेट्रोलिंग) बढ़ाई जाए। साथ ही, सोलू माजरा के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर उन चेहरों को बेनकाब किया जाए जो इस हरी-भरी संपदा को खाक कर रहे हैं। लोगों का साफ कहना है कि जब तक ऐसे तत्वों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इन बेजुबान ऑक्सीजन दाताओं को बचाना मुमकिन नहीं होगा।