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मेवात की मंडियों में सरसों की चमक: सरकारी खरीद से पहले ही एमएसपी के पार पहुंचे भाव, किसानों की बढ़ी रौनक

Mar 12, 2026 10:22 AM

मेवात। हरियाणा के दक्षिणी छोर पर स्थित नूंह (मेवात) जिले से किसानों के लिए खुश कर देने वाली खबर आ रही है। अमूमन देखा जाता है कि सरकारी खरीद शुरू होने से पहले किसान अपनी फसल औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचने पर मजबूर होते हैं, लेकिन इस बार सरसों की फसल ने सारे समीकरण बदल दिए हैं। प्रदेश में सरसों की सरकारी खरीद 28 मार्च से शुरू होनी है, मगर नूंह की अनाज मंडियों में अभी से ही किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या उससे भी बेहतर दाम मिल रहे हैं।

MSP का गणित: नमी के बावजूद मिल रहे बेहतर दाम

केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। मेवात की मंडियों में आलम यह है कि अच्छी गुणवत्ता वाली सरसों की ढेरी देखते ही व्यापारी उसे एमएसपी के आसपास के भाव पर उठा रहे हैं।

ऊंचे भाव: मंडियों में बढ़िया किस्म की सरसों 6,200 रुपये के भाव बिक रही है।

नमी वाली फसल: जिन किसानों की फसल में थोड़ी ज्यादा नमी है, उन्हें भी 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव आसानी से मिल रहा है।

आवक में तेजी: नूंह, फिरोजपुर झिरका और पुन्हाना जैसी मंडियों में अब तक 10 हजार क्विंटल से ज्यादा सरसों की आवक हो चुकी है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? वैश्विक तनाव और घरेलू मांग का असर

बाजार के जानकारों और अनुभवी व्यापारियों का कहना है कि सरसों के भाव में आई इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां एक बड़ी वजह हैं।

इंटरनेशनल मार्केट: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक खाद्य तेल बाजार को प्रभावित कर रहा है।

आयात में कमी: युद्ध जैसी स्थितियों के कारण पाम ऑयल के आयात में बाधा आई है, जिससे घरेलू बाजार में देशी सरसों तेल की डिमांड एकाएक बढ़ गई है।

सप्लाई चेन: विदेशी तेलों की अनिश्चितता ने स्थानीय व्यापारियों को सरसों का स्टॉक करने के लिए प्रेरित किया है, जिसका सीधा लाभ हरियाणा के किसानों की जेब में जा रहा है।

क्या एमएसपी को भी पीछे छोड़ देगा भाव?

नूंह मंडी के चेयरमैन ने आने वाले दिनों के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। उनके अनुसार, जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थितियां बनी हुई हैं और घरेलू मांग में इजाफा हो रहा है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में सरसों के भाव एमएसपी की सीमा को भी लांघ सकते हैं।

मंडी में फसल लेकर पहुंचे किसानों का कहना है कि इस बार प्रकृति ने भी साथ दिया है। मौसम अनुकूल रहने से पैदावार अच्छी हुई है और अब दाम भी उम्मीद से बेहतर मिल रहे हैं। किसानों के लिए यह दोहरी खुशी की बात है कि उन्हें सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और खरीद शुरू होने का इंतजार नहीं करना पड़ रहा।

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