रेवाड़ी जेल से 'ग्रेट एस्केप': हाईटेक सुरक्षा को ठेंगा दिखाकर साइबर ठग फरार, मचा हड़कंप
Mar 28, 2026 1:34 PM
हरियाणा। हरियाणा की जेलों को आधुनिक और अभेद्य बनाने के दावों के बीच रेवाड़ी से एक ऐसी खबर आई है जिसने सुरक्षा तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। जिले के फिदेड़ी गांव स्थित नवनिर्मित हाईटेक जेल से साइबर ठगी के दो शातिर आरोपी रहस्यमयी तरीके से फरार हो गए। मामला तब खुला जब शाम की रूटीन गिनती में दो सिर कम पाए गए। आनन-फानन में पूरी जेल की तलाशी ली गई, चप्पे-चप्पे को खंगाला गया, लेकिन तब तक फैजान और जाहिद सलाखों की पहुंच से कोसों दूर जा चुके थे।
गिनती ने खोली पोल: दोपहर में थे मौजूद, शाम को गायब
जेल कर्मी मुस्ताक अहमद द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, शुक्रवार 27 मार्च को जेल की व्यवस्था उनके पास थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे तक दोनों बंदी जेल परिसर के भीतर ही देखे गए थे। लेकिन सूरज ढलने के साथ जब बंदियों को बैरकों में वापस भेजने के लिए लाइन में खड़ा किया गया, तो हाजिरी अधूरी रह गई। फरार होने वाले बंदियों में उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला 22 साल का फैजान और इटावा का 21 वर्षीय जाहिद शामिल है। दोनों पर ऑनलाइन ठगी के गंभीर मामले दर्ज थे और वे यहां न्यायिक हिरासत में थे।
हाईटेक सुरक्षा या सिर्फ दिखावा? फिदेड़ी जेल की साख पर बट्टा
सवाल उठना लाजिमी है कि जिस जेल का उद्घाटन पिछले साल बड़े तामझाम के साथ हुआ था और जिसे तकनीकी रूप से 'फूलप्रूफ' बताया गया था, वहां से दो नौजवान बंदी कैसे भाग निकले? क्या सीसीटीवी कैमरे बंद थे या फिर सुरक्षाकर्मियों की नजरों में धूल झोंकी गई? इस घटना ने जेल के भीतर की निगरानी प्रणाली और सुरक्षा ऑडिट पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। फिलहाल यह पहेली बनी हुई है कि उन्होंने दीवार फांदी या किसी वाहन के जरिए बाहर निकलने में कामयाब रहे।
तीन टीमों का घेराव, बॉर्डर पर चौकसी बढ़ी
सदर थाना प्रभारी (SHO) राजेंद्र कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने बताया कि फरार ठगों को पकड़ने के लिए रेवाड़ी पुलिस, धारूहेड़ा सीआईए और सदर थाने की तीन संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। पुलिस को शक है कि आरोपी राजस्थान या अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश की ओर रुख कर सकते हैं, जिसके चलते बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और टोल प्लाजा पर निगरानी बढ़ा दी गई है। जेल प्रशासन की आंतरिक जांच भी शुरू हो गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस 'ग्रेट एस्केप' में कहीं कोई अंदरूनी मिलीभगत तो नहीं थी।