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सोनीपत कांग्रेस में बवाल: मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से किया मना, नामांकन के बाद लिया यू-टर्न

Apr 23, 2026 2:46 PM

हरियाणा। हरियाणा में नगर निगम चुनावों की तपिश के बीच सोनीपत से कांग्रेस के लिए एक बेहद बुरी खबर सामने आई है। मेयर पद के अधिकृत प्रत्याशी कमल दीवान ने चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी कल (बुधवार) ही उन्होंने रोहतक सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया था। उस वक्त जो कांग्रेस एकजुटता का दावा कर रही थी, वह नामांकन की स्याही सूखने से पहले ही बिखरती नजर आ रही है।

टिकट वितरण और 'भीतरघात' पर फंसा पेच

सूत्रों की मानें तो इस पूरे ड्रामे के पीछे कांग्रेस की पुरानी बीमारी 'गुटबाजी' जिम्मेदार है। बताया जा रहा है कि कमल दीवान पार्षदों के टिकट वितरण को लेकर पार्टी के दूसरे गुट से खासे नाराज हैं। विवाद की जड़ वे प्रत्याशी हैं, जिन्होंने पिछले उपचुनावों में कांग्रेस के खिलाफ काम किया था, लेकिन अब पार्टी का एक धड़ा उन्हें दोबारा टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। दीवान का तर्क है कि गद्दारी करने वालों को टिकट देना वफादार कार्यकर्ताओं का अपमान है। इसी खींचतान से आहत होकर उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला लिया है।

दीपेंद्र हुड्डा के दावों पर फिरा पानी!

कल जब दीपेंद्र हुड्डा ने हर वार्ड के लिए अलग घोषणापत्र जारी करने का वादा किया था, तब लगा था कि कांग्रेस इस बार बेहद आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में है। लेकिन मेयर प्रत्याशी के इस कदम ने भाजपा को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है। भाजपा ने यहाँ से दिग्गज नेता राजीव जैन को टिकट दिया है, जो पहले ही प्रचार में बढ़त बनाए हुए हैं। अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि या तो वह कमल दीवान को मनाए या फिर अंतिम समय में किसी नए और दमदार चेहरे पर दांव खेले।

मनाने का दौर जारी, पर साख को लगा बट्टा

फिलहाल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमल दीवान को मनाने की कोशिशों में जुटे हैं। खबर है कि उन्हें दिल्ली या रोहतक बुलाया जा सकता है ताकि बीच का रास्ता निकाला जा सके। लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर दीवान मान भी जाते हैं, तो भी जनता के बीच इस घटनाक्रम से जो संदेश गया है, उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। नामांकन के बाद इस तरह का यू-टर्न पार्टी की सांगठनिक कमजोरी को उजागर कर रहा है।

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