Punjab News: सुल्तानपुर लोधी में नशे ने खत्म किया पूरा परिवार, 8 साल में एक-एक कर छीन लिए चार बेटे, अब पांचवे की भी मौत
Apr 08, 2026 11:21 AM
कपूरथला: पंजाब के कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी के पंडोरी मोहल्ले में एक ही परिवार के पांच बेटों की नशे के कारण मौत का मामला सामने आया है। मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को 32 वर्षीय सोनू की भी इलाज के दौरान मौत हो गई, जिससे परिवार का आखिरी सहारा भी खत्म हो गया। मां मनजीत कौर ने रोते हुए बताया कि पिछले आठ वर्षों में उनके सभी बेटे एक-एक कर नशे की गिरफ्त में आए और तड़पते हुए दुनिया छोड़ गए। परिवार में अब सोनू की पत्नी, छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता ही बचे हैं, जबकि घर पर लगातार शोक का माहौल बना हुआ है।
नशे ने कैसे छीने पांचों बेटे
परिवार के अनुसार, घर में पहले कोई नशा नहीं करता था, लेकिन सबसे बड़े बेटे जसविंदर सिंह को नशे की लत लग गई। धीरे-धीरे यह लत बाकी चार भाइयों तक भी पहुंच गई और पूरा परिवार इसकी चपेट में आ गया। माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटों को नशा मुक्ति केंद्रों में भी भेजा, लेकिन कोई भी इस आदत से बाहर नहीं निकल पाया। आठ वर्षों में पांचों बेटों की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया और अब उनके पास कोई सहारा नहीं बचा है।
जेल से शुरू हुई मौतों की कड़ी
करीब आठ साल पहले जसविंदर सिंह पर NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था और उसे जेल भेजा गया। वहीं उसकी मौत हो गई। इसके एक साल बाद दूसरे बेटे बलविंदर सिंह की भी नशे के कारण मौत हो गई। परिवार के मुताबिक, दोनों की मौत के बावजूद तीसरे बेटे रवि ने नशा नहीं छोड़ा और 2021 में उसकी भी मौत हो गई। इन घटनाओं ने परिवार को झकझोर दिया, लेकिन नशे की लत ने बाकी बेटों को भी नहीं छोड़ा।
चौथे बेटे की 2023 में मौत
तीन बेटों की मौत के बाद माता-पिता ने चौथे बेटे मिथुन और पांचवें बेटे सोनू को समझाने की पूरी कोशिश की। बावजूद इसके, दोनों नशे से दूर नहीं हो सके। साल 2023 में मिथुन की भी मौत हो गई, जिसका कारण लंबे समय तक शराब पीने से लिवर फेल होना बताया गया। उसके खिलाफ भी NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज था। इसके बाद परिवार की उम्मीदें सिर्फ सबसे छोटे बेटे सोनू पर टिक गई थीं।
आखिरी बेटे की बिगड़ती हालत
चार बेटों को खोने के बाद माता-पिता ने सोनू को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। उसे कई अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। नशे के कारण उसका शरीर बेहद कमजोर हो गया था और डॉक्टरों को उसकी नसें तक नहीं मिल रही थीं। उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि इलाज करना भी चुनौती बन गया था और परिवार हर दिन उसकी जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा।
अस्पताल में इलाज और मौत
गांव में नशे के खिलाफ 5 अप्रैल 2026 को लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया। 6 अप्रैल को सोनू को सिविल अस्पताल सुल्तानपुर लोधी में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां भी हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में उसे अमृतसर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां 7 April 2026 को उसकी मौत हो गई। सोनू पर भी NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज था और उसकी मौत के साथ ही परिवार ने अपना आखिरी बेटा भी खो दिया।