सोनीपत में खौफ: रिटायर्ड SI के बेटे के अपहरण की कोशिश, ACP से रंजिश में मिली 10 दिन में मौत की धमकी
Apr 01, 2026 3:47 PM
सोनीपत। सोनीपत के वैस्ट रामनगर की रहने वाली ऊषा रानी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान सुनाई है। उनके पति राजेंद्र सिंह पुलिस विभाग से एसआई पद से सेवानिवृत्त हैं। शिकायत के अनुसार, उनका बेटा राकेश उर्फ धौला पहलवान बहालगढ़ स्थित एक प्रॉपर्टी ऑफिस में बैठा था, तभी अचानक वहां गाड़ियों का काफिला रुका। आरोपी सचिन डिघल अपने लाव-लश्कर के साथ दफ्तर में दाखिल हुआ और गाली-गलौच शुरू कर दी। आरोप है कि हमलावरों ने राकेश को कॉलर से पकड़ा और घसीटते हुए बाहर खड़ी गाड़ी में डालने की कोशिश की। गनीमत रही कि वहां मौजूद लोगों के विरोध और शोर-शराबे के कारण आरोपी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके।
10 दिन का अल्टीमेटम: "शिकायत वापस लो वरना लाश भी नहीं मिलेगी"
यह महज आपसी कहासुनी का मामला नहीं है, बल्कि सुनियोजित तरीके से दी गई धमकी है। पीड़िता ऊषा रानी का आरोप है कि हमलावर जाते समय एक खौफनाक अल्टीमेटम देकर गए हैं। आरोपियों ने कहा कि अगर रिटायर्ड एसीपी के खिलाफ दी गई शिकायत वापस नहीं ली गई, तो अगले 10 दिनों के भीतर राकेश की हत्या कर दी जाएगी। धमकी में यहाँ तक कहा गया कि शव का सुराग तक नहीं लगने दिया जाएगा। इस वारदात के बाद से ही धौला पहलवान का परिवार अपने घर में कैद होने को मजबूर है, उन्हें डर है कि किसी भी वक्त उन पर फिर से हमला हो सकता है।
खाकी बनाम खाकी: रंजिश की पुरानी कहानी
इस पूरे विवाद की जड़ें पुलिस महकमे के भीतर की खींचतान से जुड़ी हैं। पीड़ित परिवार ने एक रिटायर्ड एसीपी के खिलाफ स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (चंडीगढ़) में मोर्चा खोल रखा है। इसी शिकायत से तिलमिलाए पूर्व अधिकारी पर रंजिश रखने और अपने गुर्गों के जरिए परिवार को प्रताड़ित करने के आरोप लग रहे हैं। एक पूर्व SI के परिवार का एक पूर्व ACP के खिलाफ इस तरह से खड़ा होना और फिर सरेआम गुंडागर्दी का शिकार होना, स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिसिया कार्रवाई: कागजों में सिमटी जांच?
बहालगढ़ थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। जांच टीम का कहना है कि वे प्रॉपर्टी ऑफिस और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि आरोपियों की पहचान और उनके रूट का पता लगाया जा सके। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि रसूख के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब रक्षक ही एक-दूसरे के भक्षक बनने पर उतारू हो जाएं, तो न्याय की उम्मीद धुंधली पड़ने लगती है। फिलहाल, बहालगढ़ पुलिस के लिए यह मामला साख की लड़ाई बन गया है।