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Chandigarh News: बिना फूड लाइसेंस मिठाई बेचना कारोबारी का महंगा पड़ा, जिला अदालत में सुनवाई के बाद जेल भेजा

May 14, 2026 10:52 AM

चंडीगढ़: चंडीगढ़ में बिना फूड लाइसेंस मिठाइयां तैयार करने और बेचने का मामला एक कारोबारी पर भारी पड़ गया। दड़वा स्थित न्यू चंडीगढ़ स्वीट्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के संचालक आनंद कुमार को अदालत के आदेश के बाद बुड़ैल जेल भेज दिया गया है। मामला अक्टूबर 2021 में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई से शुरू हुआ था। विभाग की टीम ने यूनिट में लड्डू, बर्फी और दूसरी मिठाइयों का निर्माण और बिक्री होते पाया था। जांच के दौरान कारोबारी जरूरी फूड लाइसेंस नहीं दिखा सका, जिसके बाद उसके खिलाफ जिला अदालत में मामला दर्ज किया गया।

दड़वा यूनिट पर हुई थी छापेमारी

फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने 12 अक्टूबर 2021 को दड़वा इलाके में स्थित यूनिट पर छापा मारा था। अधिकारियों ने जांच के दौरान पाया कि यूनिट में खाद्य सामग्री तैयार कर बाजार में बेची जा रही थी। जब टीम ने यूनिट संचालक से फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज मांगे तो वह कोई वैध कागजात पेश नहीं कर पाया। इसके बाद विभाग ने नियम उल्लंघन का मामला दर्ज करते हुए अदालत का रुख किया। अधिकारियों का कहना था कि बिना लाइसेंस खाद्य पदार्थों का निर्माण सीधे तौर पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एफएसएसएआई के नियमों का उल्लंघन है। विभाग ने अदालत में रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट भी पेश की थी।

2022 में सुनाई गई थी पहली सजा

मामले की सुनवाई के बाद 12 सितंबर 2022 को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने आनंद कुमार को दोषी करार दिया था। अदालत ने उसे छह महीने की जेल और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना हर कारोबारी की जिम्मेदारी है। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आनंद कुमार ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की। उसने सजा कम करने की मांग करते हुए अदालत से राहत देने की अपील की थी। मामला जिला एवं सत्र न्यायालय पहुंचने के बाद दोबारा सुनवाई के लिए लिया गया।

सेशन कोर्ट ने सजा कम की

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज एच. एस. ग्रेवाल की अदालत ने 5 मई 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने निचली अदालत के दोषसिद्धि वाले आदेश को बरकरार रखा, लेकिन सजा छह महीने से घटाकर एक महीने कर दी। अदालत ने माना कि नियमों का उल्लंघन हुआ है, इसलिए दोषी को पूरी तरह राहत नहीं दी जा सकती। फैसले में यह भी सामने आया कि दोषी पहले ही 50 हजार रुपए का जुर्माना जमा करा चुका था। ऊपरी अदालत का आदेश आने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर बुड़ैल जेल भेज दिया। मामले ने शहर में बिना लाइसेंस चल रही फूड यूनिटों को लेकर फिर से चर्चा तेज कर दी है।

अदालत में दलीलों की जगह मांगी माफी

आमतौर पर अपील मामलों में आरोपी कानूनी दलीलें रखते हैं, लेकिन इस मामले में आनंद कुमार ने अदालत से सीधे माफी मांगी। उसने कहा कि वह न्यूरो संबंधी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा लगातार कांपता रहता है। उसने यह भी बताया कि उसका मिठाई कारोबार अब बंद हो चुका है। अदालत ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सजा कम जरूर की, लेकिन पूरी तरह माफ नहीं किया। अदालत ने साफ कहा कि खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। न्यायालय ने माना कि जनता तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाना कानून की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

फूड लाइसेंस क्यों है जरूरी

फूड सेफ्टी विभाग के अनुसार खाने-पीने की चीजों को बनाने, पैक करने, स्टोर करने, सप्लाई करने या बेचने वाले सभी कारोबारियों के लिए लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। यह प्रक्रिया एफएसएसएआई नियमों के तहत होती है। लाइसेंस जारी करने से पहले विभाग साफ-सफाई, स्टोरेज और खाद्य गुणवत्ता से जुड़े मानकों की जांच करता है। मिठाई की दुकान, ढाबा, बेकरी, डेयरी, रेस्टोरेंट और छोटे फूड स्टॉल तक को नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। विभाग का कहना है कि बिना लाइसेंस खाद्य सामग्री तैयार करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में विभाग छापेमारी, सैंपल जांच और अदालत में मुकदमा दर्ज करने जैसी कार्रवाई कर सकता है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने और जेल की सजा तक का प्रावधान है।

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