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1 अप्रैल से हरियाणा में लागू हुए ये 4 बड़े बदलाव; आपकी जेब पर पड़ेगा असर

Apr 01, 2026 3:25 PM

हरियाणा | कैलेंडर बदलते ही आज 1 अप्रैल से देश के साथ-साथ हरियाणा की तस्वीर भी काफी हद तक बदल गई है। नए वित्तीय वर्ष (2026-27) की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालने वाले कई बड़े फैसले लागू हो गए हैं। कहीं जमीन-मकान के दाम आसमान छू रहे हैं, तो कहीं बिजली के मोर्चे पर किसानों को राहत मिली है। आइए विस्तार से जानते हैं हरियाणा में आज से हुए उन 4 बड़े बदलावों के बारे में, जो सीधे आपके बजट को प्रभावित करेंगे।

 रियल एस्टेट पर 'कलेक्टर रेट' की मार: रजिस्ट्री हुई महंगी

अगर आप आज के बाद हरियाणा में घर, प्लॉट या दुकान खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। सरकार ने प्रदेश के कुल 11,947 क्षेत्रों में कलेक्टर रेट (Circle Rate) में औसतन 75 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है।

प्रभाव: कलेक्टर रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराते समय आपको सरकारी खजाने में ज्यादा स्टैंप ड्यूटी देनी होगी।

वजह: सरकार का तर्क है कि जिन इलाकों में पिछले साल रजिस्ट्रियों की संख्या अधिक रही और मार्केट वैल्यू तेजी से बढ़ी, वहां वास्तविक कीमतों के तालमेल बिठाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे राज्य के राजस्व में बड़ी वृद्धि होने की उम्मीद है।

नेशनल हाईवे पर सफर हुआ महंगा: टोल दरों में इजाफा

सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों के लिए भी खबर अच्छी नहीं है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने आज से टोल टैक्स की दरों में 4 से 5 फीसदी (करीब 5 से 10 रुपये) की बढ़ोतरी कर दी है।

NH-152D (ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे): चंडीगढ़-दिल्ली रूट पर यह अब प्रदेश का सबसे महंगा टोल बन गया है, जहां कार के लिए एक तरफ का किराया ₹375 तक पहुंच गया है।

प्रमुख टोल प्लाजा: गुरुग्राम का खेड़की दौला, हिसार का चौधरीवास और पानीपत टोल प्लाजा पर भी नई दरें लागू हो गई हैं। अब लंबी दूरी का सफर तय करना वाहन चालकों के लिए पहले से अधिक खर्चीला होगा।

बिजली के मोर्चे पर मिली-जुली खबर: किसानों को बड़ी राहत

एक तरफ जहां महंगाई का बोझ बढ़ा है, वहीं खट्टर-सैनी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए बिजली की दरों में कटौती की है। कृषि क्षेत्र: खेती-किसानी के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली को और सस्ता कर दिया गया है, जिससे सिंचाई की लागत कम होगी। 

घरेलू उपभोक्ता: सामान्य उपभोक्ताओं के लिए स्लैब सिस्टम में कुछ मामूली फेरबदल किए गए हैं, जिनका असर मासिक बिल पर दिखाई देगा। हालांकि, उद्योगों के लिए बिजली की दरों को स्थिर रखने का प्रयास किया गया है ताकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित न हो।

आबकारी नीति: चंडीगढ़ में बीयर के शौकीनों को झटका

राजधानी चंडीगढ़ और उससे सटे हरियाणा के इलाकों में नई आबकारी नीति (Excise Policy) लागू होने के साथ ही शराब और बीयर की कीमतों में बदलाव आया है। महंगी हुई बीयर: चंडीगढ़ में बीयर के दाम बढ़ गए हैं। नई नीति के तहत लाइसेंस फीस और एक्साइज ड्यूटी में बदलाव के कारण बोतलों पर प्रिंटेड रेट में इजाफा देखा जा रहा है।

हरियाणा का रुख: हरियाणा के सीमावर्ती ठेकों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि राजस्व का नुकसान न हो और नई दरों के हिसाब से ही स्टॉक की बिक्री सुनिश्चित की जा सके।

एक्सपर्ट व्यू: आम आदमी पर क्या होगा असर?

आर्थिक जानकारों का मानना है कि कलेक्टर रेट में 75% की औसत वृद्धि मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपना घर बनाने के सपने को थोड़ा कठिन बना सकती है। वहीं, टोल टैक्स में बढ़ोतरी से माल ढुलाई महंगी होने की संभावना है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, कृषि बिजली में राहत चुनावी साल या किसानों की आय बढ़ाने के दृष्टिकोण से एक सकारात्मक कदम है।

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