हरियाणा में मिक्स्ड लैंड यूज की नई पॉलिसी लागू: जानें रिहायशी और कमर्शियल जमीन के लिए क्या हैं नए नियम
Apr 04, 2026 10:32 AM
हरियाणा। नगर एवं ग्राम योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने इस नीति को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी प्रोजेक्ट का प्रमुख उपयोग (AFAR के तहत) 70% प्रस्तावित है, तो प्रस्तावक को हर हाल में न्यूनतम 70% भूमि आवरण उसी काम के लिए रखना होगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई संस्थागत प्रोजेक्ट है, तो उसका बड़ा हिस्सा संस्थान के लिए ही रहेगा, न कि उसे पूरी तरह व्यावसायिक परिसर में बदला जा सकेगा। यह नियम उन सर्विस सड़कों पर लागू होगा जो सेक्टर विभाजक सड़कों के किनारे हैं और जिनकी चौड़ाई कम से कम 24 मीटर है।
इंडस्ट्री के विस्तार पर ब्रेक, पुराने नियमों में बदलाव
इस पॉलिसी का एक सबसे अहम हिस्सा उद्योगों से जुड़ा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन विकास योजनाओं में औद्योगिक उपयोग को आवासीय या वाणिज्यिक के साथ अनुमति मिली हुई थी, वहां अब मौजूदा सीमा से अधिक विस्तार नहीं हो सकेगा।
यानी, भविष्य में इन क्षेत्रों में नई औद्योगिक इकाइयां नहीं लगेंगी और पुरानी इकाइयों का दायरा नहीं बढ़ेगा। हालांकि, यदि कोई उद्योगपति अपनी मौजूदा जमीन को आवासीय या संस्थागत उपयोग में बदलना चाहता है, तो उसे सरकार के नए मानकों और पॉलिसी पैरामीटर्स के तहत अनुमति मिल सकेगी।
न्यूनतम क्षेत्रफल और एफएआर के नए मानक
सरकार ने इस बार नीति में किसी भी तरह के भ्रम की गुंजाइश नहीं छोड़ी है। संबद्ध उपयोग (Allied Use) का प्रतिशत साढे 7% तक कम किया जा सकता है, जो कुल संबद्ध सीमा का 25% होगा। जमीन के आकार और उसके उपयोग को लेकर एक विस्तृत ढांचा तैयार किया गया है, जो शहरी नियोजन को नई दिशा देगा।