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हरियाणा के 4 विश्वविद्यालयों में विजिलेंस की 'सर्जिकल स्ट्राइक': 50 करोड़ के गबन के आरोप में कुलपति घिरे

Apr 02, 2026 1:32 PM

हरियाणा। हरियाणा के शैक्षणिक गलियारों में इन दिनों चर्चा का विषय शोध या रैंकिंग नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की वह कालिख है जो प्रदेश के चार प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के दामन पर लगी है। राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने मुख्यमंत्री कार्यालय से मिले सख्त संदेश के बाद एक साथ चार कुलपतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इनमें महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (GJU), दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST) और श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (SKAU) शामिल हैं। आरोप इतने गंभीर हैं कि यदि ये साबित होते हैं, तो यह प्रदेश के शिक्षा इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बनकर उभरेगा।

मुरथल यूनिवर्सिटी: 50 करोड़ के 'फिक्स्ड डिपॉजिट' का खेल

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सोनीपत के मुरथल स्थित DCRUST यूनिवर्सिटी को लेकर हुआ है। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र कोष के करीब 50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि के साथ 'जुगाड़' बिठाया। सरकारी नियमों के मुताबिक यह पैसा सरकारी बैंक में होना चाहिए था, लेकिन कथित तौर पर इसे एक निजी बैंक में कम ब्याज दर पर एफडी (FD) के रूप में रखा गया। विजिलेंस इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या इस ट्रांजैक्शन के पीछे किसी तरह का 'कमीशन' का खेल था, जिसने यूनिवर्सिटी के खजाने को सीधा चपत लगाई है।

पौधों की खरीद से लेकर भर्ती रोस्टर तक की धांधली

भ्रष्टाचार की यह फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। रोहतक के MDU में पूर्व कुलपति राजबीर सिंह पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में 20 हजार पौधों की खरीद में कागजी खानापूर्ति कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया। वहीं, हिसार के GJU में प्रो. नरसी राम पर नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्तियों में चहेतों को रेवड़ियाँ बांटने का आरोप है। कुरुक्षेत्र के SKAU में तो मामला सामाजिक न्याय से जुड़ा है; यहाँ प्रो. करतार सिंह धीमान पर नियुक्तियों के दौरान आरक्षण रोस्टर और नियमों को दरकिनार करने के संगीन इल्जाम लगे हैं।

"बख्शे नहीं जाएंगे दोषी": विजिलेंस की समयबद्ध कार्रवाई

विजिलेंस ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) अर्शिंदर सिंह चावला ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच अब औपचारिक दौर से निकलकर सबूतों को जुटाने के चरण में पहुंच गई है। ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमें सरकार की ओर से फ्री-हैंड दिया गया है। संबंधित अधिकारियों को साफ निर्देश हैं कि वे प्राथमिकताओं के आधार पर एक तय समय सीमा में दूध का दूध और पानी का पानी करें।" दूसरी ओर, आरोपी कुलपतियों ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे 'प्रशासनिक साजिश' करार दिया है।

फिलहाल, इस कार्रवाई ने हरियाणा की राजनीति और शिक्षा जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। क्या ये कुलपति खुद को पाक-साफ साबित कर पाएंगे या विजिलेंस का यह शिकंजा उनकी कुर्सी और साख दोनों को निगल जाएगा, इसका फैसला आने वाले कुछ महीनों की तफ्तीश में छिपा है।

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