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पानीपत में नकल का 'सरकारी' सिंडिकेट: पुलिस और टीचर खुद बांट रहे थे पर्चियां, वीडियो ने खोली पोल

Apr 02, 2026 1:06 PM

पानीपत। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की साख पर एक बार फिर गहरा बट्टा लगा है। पानीपत के इसराना और डाहर केंद्रों से सामूहिक नकल की जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वे किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार करने के लिए काफी हैं। यहाँ परीक्षा की शुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर थी, वही नकल माफिया के 'सारथी' बने नजर आए। बोर्ड चेयरमैन की स्पेशल रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की जांच में खुलासा हुआ है कि इन केंद्रों पर नकल महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि पुलिस, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय चेकिंग टीम की मिलीभगत से रचा गया एक सोची-समझी साजिश थी।

फ्लाइंग टीम की आँखों में झोंकी धूल: कैमरों के साथ 'लुका-छिपी'

जांच टीम को चकमा देने के लिए यहाँ बाकायदा एक 'एसओपी' तैयार की गई थी। जैसे ही बोर्ड की फ्लाइंग टीम या कोई उच्चाधिकारी केंद्र के पास पहुंचता, कैमरों को दुरुस्त कर दिया जाता और छात्र एकदम अनुशासित नजर आते। लेकिन टीम के जाते ही असली खेल शुरू होता था। स्पेशल RAF के सूत्रों ने बताया कि 12 मार्च के बाद से सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को बड़ी चालाकी से बंद कर दिया गया था। जब टीम ने पुराने डेटा और बैकअप की पड़ताल की, तो पता चला कि परीक्षा के दौरान रिकॉर्डिंग गायब थी। लेकिन फरवरी माह की कुछ फुटेज जांच टीम के हाथ लग गई हैं, जो इस संगठित अपराध का पुख्ता सबूत पेश कर रही हैं।

वीडियो में कैद हुआ सच: रक्षक ही निकले भक्षक

जांच के दौरान हाथ लगे वीडियो किसी के भी होश उड़ा सकते हैं। इन दृश्यों में साफ देखा जा सकता है कि परीक्षा केंद्र के गेट पर तैनात पुलिसकर्मी और अंदर मौजूद महिला टीचर व सेंटर सुपरिटेंडेंट खुद बच्चों के पास जाकर पर्चियां (नकल सामग्री) बांट रहे हैं। कहीं-कहीं तो शिक्षक खुद बच्चों को उत्तर लिखवाते हुए दिखाई दिए। यह नजारा व्यवस्था पर एक करारा तमाचा है कि जिस खाकी पर नियम लागू करवाने की जिम्मेदारी थी, वही नकल के इस तांडव की पहरेदार बनी हुई थी।

अब गाज गिरना तय: सभी परीक्षाएं रद्द करने की तैयारी

बोर्ड के सख्त तेवरों को देखते हुए अब इसराना और डाहर के इन परीक्षा केंद्रों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। जांच टीम ने हाथ लगे वीडियो और सीसीटीवी डेटा के आधार पर यहाँ हुई 12वीं की सभी परीक्षाओं को रद्द करने की सिफारिश की है। बोर्ड चेयरमैन का रुख साफ है कि नकल के इस खेल में शामिल किसी भी छोटे या बड़े अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर भी इन आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि जब तक 'पहरेदार' खुद ईमानदार नहीं होंगे, तब तक नकल मुक्त परीक्षाओं का सपना केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा।

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