रोहतक कोर्ट का बड़ा फैसला: मासूम से दुष्कर्म के दोषी सलमान को 10 साल की जेल, मुआवजे का भी आदेश
Apr 01, 2026 3:07 PM
रोहतक। रोहतक में मानवता को शर्मसार करने वाले एक मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। यह घटना जनवरी 2024 की है, जब आरोपी सलमान उर्फ मोहित ने पड़ोस में रहने वाली एक 12 साल की मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया। वारदात की पटकथा बेहद शातिराना ढंग से लिखी गई थी। आरोपी ने पीड़िता की मां को फोन कर झांसा दिया कि उसकी पत्नी बीमार है और घर के काम और देखभाल के लिए उसे अपनी बेटी को उसके घर भेज देना चाहिए। पड़ोसी पर भरोसा कर मां ने अपनी कलेजे के टुकड़े को मदद के लिए भेज दिया, लेकिन वहां मासूम का इंतजार कोई और ही खौफनाक मंजर कर रहा था।
घर में अकेला पाकर किया दुष्कर्म, पत्नी ने भी की बेरहमी
पीड़िता ने अदालत में अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि जब वह सलमान के घर पहुंची, तो वहां न तो उसकी पत्नी थी और न ही बच्चे। मौका पाकर आरोपी ने मासूम को डराया-धमकाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। हैरान करने वाली बात यह रही कि जब इस दौरान आरोपी की पत्नी घर लौटी, तो उसने पीड़िता को सहारा देने या पुलिस को सूचना देने के बजाय उल्टा मासूम के साथ ही मारपीट शुरू कर दी। लोकलाज और डर के साये से बाहर निकलकर जब मामला पुलिस तक पहुंचा, तो तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
अदालत का सख्त रुख: 10 साल की कैद और मुआवजे का आदेश
एडिशनल सेशन जज शैलेंद्र सिंह की अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए। अदालत ने माना कि आरोपी ने न केवल कानून तोड़ा है, बल्कि पड़ोसी धर्म और भरोसे का भी कत्ल किया है। कोर्ट ने सलमान को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 35,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। यदि दोषी जुर्माना भरने में विफल रहता है, तो उसे अतिरिक्त जेल काटनी होगी। इसके साथ ही, जज ने पीड़िता के भविष्य और उसके पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया।
न्याय की जीत: रोहतक पुलिस और अभियोजन की सक्रियता
इस फैसले के बाद कानूनी जानकारों का कहना है कि पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत इस तरह की त्वरित और सख्त सजा से अपराधियों के मन में डर पैदा होगा। रोहतक पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट से लेकर वैज्ञानिक साक्ष्यों तक को बेहद मजबूती से पेश किया था, जिसके चलते आरोपी को बचने का कोई रास्ता नहीं मिला। स्थानीय निवासियों ने भी अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है, जो मासूमों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।