Hansi Samadhan Shivir: हांसी में 46 डिग्री की गर्मी में जनता बेहाल, समाधान शिविर में नहीं हो रही सुनवाई, फूटा लोगों का गुस्सा
Jun 08, 2026 5:16 PM
हांसी। जनता की चौखट पर जाकर उनकी समस्याओं को फौरन निपटाने के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। हांसी में प्रशासनिक मुस्तैदी को परखने के लिए लगाए जा रहे समाधान शिविर अब महज एक औपचारिक औपचारिकता बनकर रह गए हैं। आसमान से बरसती 46 डिग्री सेल्सियस की आग और चिलचिलाती धूप के बीच सोमवार को भारी उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीणों के हाथ एक बार फिर सिर्फ आश्वासन और मायूसी ही लगी। लोगों का सीधा आरोप है कि यह शिविर केवल कागजी खानापूर्ति का जरिया बन चुके हैं, जहां घंटों कतारों में खड़े होने के बाद भी बुनियादी दिक्कतों का कोई हल नहीं निकल पा रहा है।
कागजों से गायब हो रही फरियाद, रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ही खेल!
इस समाधान शिविर की सबसे चौंकाने वाली हकीकत इसके पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) काउंटर पर देखने को मिली। सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रत्येक सोमवार और वीरवार को लगने वाले इस शिविर में औसतन 30 से 40 लोग अपनी गुहार लेकर पहुंचते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 10 या 12 शिकायतों को ही ऑन-रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। बाकी बची शिकायतों को बिना किसी तकनीकी या आधिकारिक रसीद के ऐसे ही टाल दिया जाता है। इस कड़वे सच के कारण पीड़ित परिवारों को अगले हफ्ते फिर उसी तपती धूप में लंबी लाइनों का हिस्सा बनना पड़ता है।
सिस्टम की मार: दो साल से राशन और पहचान को तरस रहे लोग
शिविर की बदइंतजामी का दर्द बयां करते हुए गांव माजरा से आए भगीरथ ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया, "कागजों में मेरी फैमिली आईडी के अंदर सालाना आय बिल्कुल सही और नियमों के मुताबिक दर्ज है। इसके बावजूद पिछले दो साल से मेरा राशन कार्ड नहीं बन पाया। दफ्तरों के जूते घिस गए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।" कुछ ऐसा ही रोना ढाणी पिरान निवासी अरुण का भी था। अरुण ने कहा कि पिछले एक साल से उनके परिवार के पांच सदस्य सिर्फ एक अदद फैमिली आईडी (परिवार पहचान पत्र) बनवाने के लिए भटक रहे हैं। सरकारी बाबुओं के चक्कर काट-काटकर पैर थक चुके हैं, पर व्यवस्था टस से मस नहीं हो रही।
मीडिया पर पाबंदी से उपजा नया विवाद, डीसी बोले—'काम जारी है'
इस हंगामे के बीच उस वक्त नया विवाद खड़ा हो गया जब शिविर की जमीनी हकीकत को कैमरे में कैद करने पहुंचे स्थानीय पत्रकारों को प्रशासन ने अंदर जाने से रोक दिया। जनसमस्याओं को दिखाने पहुंचे मीडियाकर्मियों से अधिकारियों ने 'निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले अनुमति लेने' का अजीबोगरीब फरमान सुना दिया। इस कदम को लेकर भी लोगों में चर्चा रही कि क्या प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश कर रहा है?
हालांकि, इस पूरे मामले पर प्रशासनिक पक्ष रखते हुए हांसी के डीसी राहुल नरवाल ने मीडिया को भरोसा दिलाया है कि किसी भी शिकायत को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, "समाधान शिविर में आने वाली हर एक अर्जी को लेकर विभाग गंभीर है। जो पुराने या जटिल मामले लंबित चल रहे हैं, उनकी व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा की जा रही है और संबंधित विभागों को उन्हें युद्धस्तर पर निपटाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।"