बहादुरगढ़ में 3 दिन के नवजात का 9 लाख में सौदा, पुलिस ने 3 तस्कर दबोचे
Apr 01, 2026 2:54 PM
बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ पुलिस ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक ऐसे गिरोह पर शिकंजा कसा है, जो नवजात बच्चों को 'सामान' की तरह ऊंचे दामों पर बेचता था। डीसीपी मयंक मिश्रा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर नाकाबंदी कर एक महिला और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया। इनके पास से महज तीन दिन का एक मासूम बच्चा मिला है, जिसे ये तस्कर पंजाब के फरीदकोट से 'लिफ्ट' कर दिल्ली ले जा रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी सलीम और अखिल के रूप में हुई है, जबकि महिला आरोपी बेअंत कौर पंजाब के मुक्तसर की रहने वाली है।
मुनाफे का गणित: 2 लाख की 'खरीद' और 9 लाख का 'सौदा'
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। इस गिरोह ने नवजात बच्चे को पंजाब से करीब सवा दो लाख रुपये में हासिल किया था। दिल्ली के एक निसंतान दंपति के साथ इस बच्चे का सौदा 9 लाख 25 हजार रुपये में तय हो चुका था। आरोपी इतने शातिर हैं कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर ऐसे अमीर और निसंतान दंपतियों को ट्रैक करते थे, जो बच्चा गोद लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हों। आरोपी सलीम एक करियाना स्टोर चलाता है, जबकि अखिल सीएससी (Common Service Center) संचालक है, जिसकी आड़ में वे इस काले धंधे को अंजाम दे रहे थे।
नर्सों का जाल और अंतरराज्यीय नेटवर्क
इस गिरोह की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनका नेटवर्क पंजाब से लेकर महाराष्ट्र तक फैला हुआ है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह के सरगना की पत्नी और गिरफ्तार महिला आरोपी की बेटी पेशे से नर्स हैं। अस्पताल के भीतर उनकी पहुंच का फायदा उठाकर ही बच्चों की तस्करी को अंजाम दिया जाता था। पुलिस अब तक पांच ऐसी वारदातों का सुराग लगा चुकी है जहां बच्चों का सौदा किया गया। आरोपियों के पास से तस्करी में इस्तेमाल होने वाली दो गाड़ियां और कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।
पुलिस का सख्त रुख: खरीदार भी नहीं बचेंगे
डीसीपी मयंक मिश्रा ने कड़े लहजे में कहा कि बच्चा गोद लेने की एक कानूनी प्रक्रिया होती है और इसके इतर किया गया कोई भी लेन-देन संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने साफ किया कि पुलिस केवल तस्करों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने इन मासूमों को खरीदा है। फिलहाल बरामद बच्चा डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित है। पुलिस अब फरार चल रहे गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश में कई राज्यों में दबिश दे रही है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट की कमर तोड़ी जा सके।