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Monday, March 01, 2021
Editorial
बजट से अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती - मयंक मिश्रा

देश भर में फैली कोरोना महामारी के कारण बदहाल हुई अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में देश का आम बजट पेश कर भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिए। देश आने वाले वित्तीय वर्ष में तेज आर्थिक रफ्तार पकड़ेगा। निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कोरोना वायरस जैसी महामारी के बीच पेश किए गए बजट में निर्मला सीतारमण ने कई महत्वपूर्ण ऐलान किए। देश के इतिहास में यह पहला बजट है जिसकी छपाई नहीं हुई है। बजट 2021 डिजिटल तौर पर टैबलेट के जरिए पेश किया गया है।

कोविड वैक्सीन: भारतीयों को अपने वैज्ञानिकों पर सबसे ज्यादा भरोसा, टीकाकरण में दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बना भारत - योगेश कुमार गोयल

कोरोना के अंत के लिए भारत में गत 16 जनवरी को दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था और पहले ही दिन 207229 लोगों को कोरोना का टीका लगाकर भारत इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण करने वाला पहला देश बन गया था। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के मुताबिक अमेरिका में एक दिन में सर्वाधिक 79458, ब्रिटेन में 19700 और फ्रांस में 73 टीके ही लगे थे जबकि भारत में पहले ही दिन दो लाख से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हुआ था, हालांकि लक्ष्य तीन लाख लोगों का था।

भारत की स्वास्थ्य सेवा नीति: महामारी के अलावा - अबिनाश दास

भारत के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और उनकी खुशहाली के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली तक उनकी पहुंच, सामर्थ्य और जवाबदेही का होना आवश्यक है। श्रम उत्पादकता में सुधार और बीमारियों के आर्थिक बोझ को कम करके स्वास्थ्य सीधे तौर पर घरेलू आर्थिक विकास को प्रभावित करता है। बारो (1996) ने पाया कि जीवन प्रत्याशा 50 वर्ष से बढ़कर 70 वर्ष (40 प्रतिशत की वृद्धि) होने से आर्थिक वृद्धि दर प्रति वर्ष 1.4 प्रतिशत अंक बढ़ सकती है।

केंद्रीय बजट 2021-22: आत्मविश्वास के साथ रणनीति में बदलाव - तरुण बजाज

यह उद्धरण,उथल-पुथल भरे वर्ष 2020 के दौरान प्रत्येक भारतीय द्वारा दिखाए गए धीरज, संकल्प और सहनीयता को स्पष्ट करता है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ केवल 36 रन पर पूरी टीम का आउट होना, पूरे आत्म-विश्वास के साथ अगले मैच को ड्रॉ कराना तथा अंतिम मैच में आक्रामक जीत के साथ सीरीज भी जीत लेना - भारतीय टीम के हाल के प्रदर्शन में भी यही भावना प्रतिध्वनित होती है।

जल जीवन मिशन : पानी के जरिये एक सामाजिक क्रांति - रतन लाल कटारिया

मैं हरियाणा के एक छोटे से गाँव में पला-बढ़ा। एक गरीब दलित परिवार से ताल्लुपक, गरीबी और बहिष्कार का ही केवल जीवन में सामना किया था। मेरे माता-पिता की दिनचर्या अपने परिवार के लिए 2 वक्तस के भोजन की व्य वस्था करना था। मेरे पिता  जूता बनाने का काम करते थे, जबकि मेरी माँ एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में मेहनत करती थी।

एक सपनों का बजट, जो कोविड के बाद की अवधि में न केवल तत्कालरिकवरी के लिए, बल्कि दशक के दौरान उच्च विकासके लिए भी मार्ग प्रशस्त करता है - डॉ केवी सुब्रमण्यन

स्वास्थ्य देखभाल बजट में 137 प्रतिशत की वृद्धि; बुनियादी ढांचाव्यय में 32प्रतिशत की वृद्धि, जिसमें राज्यों और स्वायत्त निकायों के लिए 2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन शामिल नहीं है;दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक बीमा कंपनी का निजीकरण;बैंकों की बैलेंस शीट को व्यवस्थित करने के लिए निजी क्षेत्र में एक बैड बैंक; कर प्रणाली व्यवस्थित करने के साथ करों में कोई वृद्धि नहीं

शासन का सबसे उत्पीडित अंग - डॉ0 एस. सरस्वती

उच्चतम न्यायालय ने 17 दिसंबर 2020 को किसानों के आंदोलन से जुडे मामले में टिप्पणी की कि किसानों को शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है किंतू हिंसा करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं है। उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयोे नें अनेक बार विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपने इस रूख को दोहराया है और कहा है कि इससे आम नागरिकों को परेशानी होती है।

रोगों का नाश करती है शरद पूर्णिमा - बाल मुकुन्द ओझा

हिंदू पंचांग के अनुसार अक्टूबर और नवम्बर माह में कई बड़े व्रत-त्योहार पड़ रहे हैं। इनमें  शरद पूर्णिमा का पावन पर्व 30 अक्टूबर, शुक्रवार को देशभर में मनाया जाएगा। शरद ऋतु की पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण तिथि है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 30 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 45 मिनट से हो रहा है, जो अगले दिन 31 अक्टूबर को रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। शरद पूर्णिमा 30 अक्टूबर को होगी। शरदीय नवरात्र के बाद पड़ने वाली पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है।

धारा 370 का निराकरण : नियति के साथ वास्तविक साक्षात्कार

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में सीधे क्रॉउन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के साथ-साथ 565 रियासतों का एक समूह भी शामिल था जो क्राउन संपत्ति का हिस्सा नहीं होने के बावजूद सहायक गठबंधनों की एक प्रणाली में बंधा था। रियासतों का अपने आंतरिक मामलों पर नियंत्रण था। लेकिन रक्षा और विदेश मामलों पर नियंत्रण ब्रिटिश सरकार के हाथों में भारत के वायसराय के तहत था। इसके अलावा फ्रांस और पुर्तगाल द्वारा नियंत्रित कई औपनिवेशिक परिक्षेत्र थे। 

चुनावों में गालियों का प्रयोग : जितने कडवे बोल उतना अच्छा - पूनम आई कौशिश

लोकतंत्र हितों का टकराव है जो इस तीखे, धुंआधार चुनावी मौसम में सिद्धांतों के टकराव का रूप लेता जा रहा है। इस चुनावी मौसम में हमारे नेताओं द्वारा झूठ और विषवमन, गाली गलौच, कडुवे बोल देखने सुनने को मिल रहे हैं और पिछले एक पखवाडे से हम यह सब कुछ देख रहे हैं। गाली-गलौच, अपशब्द, दोषारोपण आज एक नए राजनीतिक संवाद बन गए है और जिन्हें सुनकर दशक सीटियां बजाने लगते हैं इस आशा में कि यह उन्हें राजनीतिक निर्वाण दिलाएगा।

बिहार चुनाव: बीच विमर्श में पाकिस्तान ? - निर्मल रानी

बिहार विधान सभा में चुनाव प्रचार ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली है। इस बार के चुनावों में कुछ नए राजनैतिक समीकरण भी देखने को मिल रहे हैं। आम तौर पर चुनावों में सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों व विगत पांच वर्ष की अपनी कारगुज़ारियों व जनता के लिए किये गए अपने लोकहितकारी योजनाओं को गिनाकर वोट मांगता है। 

पर उपदेश :बिहार में कोरोना विस्फ़ोट हुआ तो - निर्मल रानी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप जिन्हें हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना अच्छा मित्र बताते हैं, वे मौक़ा मिलते ही भारत को शर्मसार करने से बाज़ नहीं आते। गत कुछ दिनों के भीतर ही उन्होंने दो बार भारत को नीचा दिखाने की कोशिश की। एक बार प्रदूषण फैलाने के लिए चीन के बराबर का ज़िम्मेदार बताकर तो दूसरी बार कोरोना संबंधी आंकड़ों पर सवाल उठाकर।

बॉलीवुड के दो हरदिल अजीज सितारे अलविदा

साल 2020 यूं तो पूरी दुनिया के लिए दुखदायी है लेकिन बॉलीवुड के लिए ये साल किसी बुरे सपने से कम नहीं है। कोरोना संक्रमण से जहाँ देश और दुनिया पर विपदा के संकट छा  रहे थे ऐसे में बालीबुड के दो लोकप्रिय सितारों के निधन से पूरा देश स्तब्ध है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए इससे बड़ा सदमा दूसरा नहीं हो सकता कि 24 घंटों के अंदर दो सिनेमाई जीनियस इस दुनिया को छोड़कर चले गये हों। एक के बाद एक इन दो बड़े हादसों ने उनके परिवारवालों और फैन्स का दिल बुरी तरह से तोड़ दिया है। कोरोना संकट के बीच बॉलीवुड जगत ने महज दो दिन के भीतर अपने दो बड़े सितारों को खो दिया है।

बैसाखी पर करें दुनिया को कोरोना से मुक्ति दिलाने की अरदास

भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारे यहां बैसाखी पर्व का संबंध फसलों के पकने के बाद उसकी कटाई से जोड़कर देखा जाता रहा है। इस पर्व को फसलों के पकने के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है। यह त्यौहार विशेष तौर पर पंजाब का प्रमुख त्यौहार माना जाता रहा है लेकिन यह त्यौहार सिर्फ पंजाब में नहीं बल्कि देशभर में लगभग सभी स्थानों पर खासतौर से पंजाबी समुदाय द्वारा प्रतिवर्ष बड़ी धूमधाम